अंतर्राष्ट्रीय
10-Jun-2026
...


-तेरा बाप भी देगा आजादी से गूंज रहा ब्रिटेन लंदन,(ईएमएस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ ब्रिटेन में निवासरत कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लंदन में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों प्रदर्शनकारी लंदन स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर एकत्र हुए और शाहबाज सरकार व सेना के खिलाफ नारेबाजी की, जिसमें क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों का आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने पीओके में नागरिकों की हत्याओं, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का दावा किया, साथ ही आरोप लगाया कि लोगों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है और आम आदमी के अधिकारों को कुचला जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान, पाकिस्तानी आर्मी गो बैक, हम छीन कर लेंगे आजादी, ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है, और तेरा बाप भी देगा आजादी जैसे सशक्त नारे गूंज उठे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि पीओके में हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और असंतोष चरम पर पहुंच गया है। केवल लंदन ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन के कई अन्य प्रमुख शहरों में स्थित पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के बाहर भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए। इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पीओके की गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने और वहां कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने की पुरजोर मांग की। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लेकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध किया तथा वैश्विक संस्थाओं से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की। पीओके में तनाव हाल के दिनों में तब बढ़ा जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उसके समर्थकों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई। इसी पृष्ठभूमि में ब्रिटेन में बसे कश्मीरी मूल के लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पीओके के लोगों के अधिकारों और उनकी राजनीतिक नेतृत्व की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि असंतोष को बातचीत के बजाय सुरक्षा बलों के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है। जेएएसी के विरोध की मुख्य वजह पीओके की विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया एक विवादास्पद फैसला है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं जो कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। जेएएसी और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और बाहरी प्रभाव बढ़ेगा, जबकि क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों पर अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों का होना चाहिए। इसके अलावा, संगठन ने बढ़ती महंगाई, गंभीर बिजली संकट, बेरोजगारी और खराब प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ क्षेत्र की राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। पिछले दो वर्षों के दौरान जेएएसी ने आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शन आयोजित किए हैं, जिनमें अक्सर सुरक्षा बलों के साथ टकराव की स्थिति भी देखने को मिली। आशीष/ईएमएस 10 जून 2026