नरसंहार कर रही मुनीर की सेना, सीधे दाग रही गोलियां इस्लामाबाद,(ईएमएस)।पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस वक्त हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं। बुनियादी अधिकारों और आजादी की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर हैं, वहीं पाकिस्तानी सेना इस जन-आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर चुकी है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाने की भयावह तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसने वैश्विक समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस हिंसा में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रावलाकोट के एक दर्दनाक वीडियो में साफ दिख रहा है कि सुरक्षा बल एक निहत्थे नागरिक को घेरकर तब तक गोलियां मारते रहे, जब तक कि वह पूरी तरह छलनी नहीं हो गया। दमन का आलम यह है कि पाक सेना ने जनाजों तक को नहीं बख्शा और उन पर भी फायरिंग कर दी। हालात को दबाने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रही ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर इसके नेताओं पर एक करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित कर दिया गया है। यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है। जैक के नेतृत्व में स्थानीय लोग पिछले एक साल से गेहूं, आटे और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत ने बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुना। इसके अलावा, विरोध की एक बड़ी वजह राजनीतिक धांधली भी है। प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। ये सीटें उन लोगों के लिए हैं जो जम्मू-कश्मीर से आकर अब इस्लामाबाद, रावलपिंडी या कराची में बस चुके हैं। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई इन सीटों का इस्तेमाल हिज़्बुल मुजाहिदीन जैसे चरमपंथी संगठनों के सदस्यों और उनके रिश्तेदारों को विधानसभा में भेजने के लिए करती है। कुल 45 में से इन 12 सीटों पर कब्जा करके सेना वहां अपनी मर्जी की सरकार और प्रधानमंत्री चुनती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा अब्दुल्ला सईद शाह है, जो इस आतंकी पृष्ठभूमि के बावजूद पीओके सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रह चुका है। जल्लादों ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा इसके बावजूद, जनता का हौसला कम नहीं हुआ है। रावलकोट, मुज़फ्फराबाद, कोटली, भिंबर और सुधनोती जैसे इलाकों में प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। आजादी के नारों के साथ पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने सड़कों पर जाम लगा दिया है। सुधनोती में लोग लाठियां लेकर सेना को चुनौती दे रहे हैं। पुलिस और रेंजर्स द्वारा पेलेट गन तथा आंसू गैस के अंधाधुंध इस्तेमाल से मुज़फ्फराबाद का नीलम ब्रिज रणक्षेत्र में तब्दील हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार दिनों में 19 बच्चों और 7 गर्भवती महिलाओं समेत 41 लोगों की मौत हुई है, लेकिन जमीन पर यह संख्या कहीं अधिक है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/10जून2026