राष्ट्रीय
10-Jun-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। उद्योगपति अनिल अंबानी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने काला धन (ब्लैक मनी) अधिनियम, 2015 के तहत उनके खिलाफ प्रस्तावित आपराधिक मुकदमा और दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही, अंबानी द्वारा इस कानून की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका भी स्वीकार कर ली गई है। न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आयकर विभाग को स्पष्ट आदेश दिया है कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक अनिल अंबानी के खिलाफ कोई भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। इसमें आपराधिक मुकदमा दर्ज करना और जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई भी शामिल है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर विभाग द्वारा पहले जारी किए गए मूल्यांकन आदेश के खिलाफ अनिल अंबानी की ओर से आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष दायर अपील की सुनवाई सामान्य रूप से जारी रह सकती है। दरअसल, आयकर विभाग ने 8 अगस्त 2022 को अनिल अंबानी को नोटिस जारी किया था। विभाग का आरोप है कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में रखी गई 814 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्तियों की जानकारी छिपाई और इस पर लगभग 420 करोड़ रुपये के कर का भुगतान नहीं किया। आयकर विभाग का दावा है कि अंबानी ने अपनी आयकर रिटर्न में विदेशी बैंक खातों और विदेशों में अपने आर्थिक हितों का खुलासा नहीं किया। ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51 के तहत इस तरह के मामलों में मुकदमा चलाया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है। अपनी याचिका में अनिल अंबानी ने तर्क दिया है कि ब्लैक मनी एक्ट वर्ष 2015 में लागू हुआ था, जबकि जिन लेन-देन और संपत्तियों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वे मूल्यांकन वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। इसलिए इस कानून को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कानून की कुछ धाराएं भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करती हैं और उनकी संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार होना चाहिए। आयकर विभाग के अनुसार, अनिल अंबानी बहामास स्थित ‘डायमंड ट्रस्ट’ के आर्थिक योगदानकर्ता और लाभार्थी मालिक थे। इसके अलावा, उनका संबंध ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत ‘नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड’ नामक कंपनी से भी बताया गया है। विभाग का आरोप है कि इन विदेशी परिसंपत्तियों और खातों का उल्लेख आयकर रिटर्न में नहीं किया गया। विभाग ने अघोषित विदेशी संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 814.27 करोड़ रुपये आंका है, जबकि इन पर देय कर राशि करीब 420.29 करोड़ रुपये बताई गई है। हाईकोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने के बाद अब ब्लैक मनी एक्ट की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता पर महत्वपूर्ण न्यायिक सुनवाई होने की संभावना है। फिलहाल अनिल अंबानी को अंतरिम राहत मिल गई है, लेकिन मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा। संजय/संतोष झा- १० जून/२०२६/ईएमएस