क्षेत्रीय
10-Jun-2026
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दतिया ( ईएमएस ) | कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने आज बुधवार को जिला प्रशासन द्वारा पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित निःशुल्क सिविल सेवा एवं प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग केंद्र में अभ्यर्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के महत्वपूर्ण गुर बताए तथा सफलता के लिए आवश्यक गुणों पर विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर श्री वानखड़े ने कहा कि कोई भी प्रतियोगी परीक्षा आसान नहीं होती। किसी भी परीक्षा में सफलता का निर्धारण प्रतियोगिता के स्तर से होता है और प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा का सफलता प्रतिशत बहुत कम होता है। ऐसे में केवल पाठ्यक्रम पूरा कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वयं की क्षमताओं का निरंतर आकलन करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी पाठ्यक्रम पूरा करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि उनकी वास्तविक ताकत और कमजोरियां क्या हैं। सफलता के लिए आत्मविश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण है और आत्मविश्वास तभी विकसित होता है जब व्यक्ति अपनी क्षमताओं का सही मूल्यांकन करता रहे। कलेक्टर ने अभ्यर्थियों से कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बने रहने के लिए अनुशासन, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास और निरंतरता जैसे गुणों का विकास करना आवश्यक है। जब तक विद्यार्थी स्वयं को नहीं समझेंगे, तब तक वे अपनी तैयारी को सही दिशा नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि नई-नई चीजें पढ़ना सभी को अच्छा लगता है, लेकिन केवल ज्ञान अर्जित करना पर्याप्त नहीं है। कई विद्यार्थी वर्षों तक अध्ययन करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाते क्योंकि वे नियमित पुनरावृत्ति (रिवीजन) नहीं कर पाते। यदि रिवीजन की प्रक्रिया को सही ढंग से समझ लिया जाए और उसे तैयारी का हिस्सा बना लिया जाए, तो सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। कलेक्टर श्री वानखड़े ने कहा कि अधिकांश अभ्यर्थी विषयों को समझ तो लेते हैं, लेकिन उन्हें व्यवहार में लागू नहीं कर पाते। सफलता उन्हीं को मिलती है जो सीखी हुई बातों को अपनी दिनचर्या और तैयारी में प्रभावी ढंग से लागू करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया तथा उन्हें लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।