मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई में पानी के टैंकरों की आपूर्ति ठप होने से पैदा हुआ जल संकट फिलहाल टल गया है। मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन (एमडब्ल्यूटीए) ने मंगलवार को अपनी हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी। यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया, जिसमें कहा गया कि कुआं मालिकों और टैंकर ऑपरेटरों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। - सीजीडब्ल्यूए के नोटिस के विरोध में हुई थी हड़ताल मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन ने हाल ही में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिसों के विरोध में हड़ताल शुरू की थी। इन नोटिसों में कई कुआं मालिकों को टैंकरों को पानी की आपूर्ति रोकने और नए लाइसेंस प्राप्त करने का निर्देश दिया गया था। एसोसिएशन का आरोप था कि मुंबई में सीजीडब्ल्यूए के नियमों को चुनिंदा और अत्यधिक सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है, जिससे टैंकर व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। एमडब्ल्यूटीए के सचिव अमोल मंधारे के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके बाद एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बांद्रा स्थित जिला कलेक्टर कार्यालय में मुलाकात की। कलेक्टर ने बताया कि वह मुंबई महानगरपालिका को पत्र लिखकर कुआं संचालकों और जल आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने का अनुरोध करेंगे। एमडब्ल्यूटीए के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि एसोसिएशन की चिंताओं को सीजीडब्ल्यूए और जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा तथा नियमों में संशोधन की मांग की जाएगी। - हड़ताल से हजारों परिवार प्रभावित रविवार मध्यरात्रि के बाद शुरू हुई हड़ताल ने मुंबई में पानी की आपूर्ति पर गंभीर असर डाला। शहर पहले ही 10 प्रतिशत जल कटौती और जलाशयों में घटते जल भंडार की समस्या का सामना कर रहा है। टैंकरों की आपूर्ति बंद होने से हजारों आवासीय सोसायटियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अनौपचारिक बस्तियां प्रभावित हुईं। कई हाउसिंग सोसायटियों ने आरोप लगाया कि संकट के दौरान कुछ टैंकर संचालकों ने अधिक कीमत वसूली और पानी की आपूर्ति सीमित कर दी। - क्या हैं सीजीडब्ल्यूए के नए नियम? टैंकर संचालकों और प्रशासन के बीच विवाद वर्ष 2023 से जारी है, जब केंद्र सरकार की 2020 की भूजल निकासी संबंधी गाइडलाइन प्रभावी हुई। इन नियमों के अनुसार: लाइसेंस केवल उन्हीं कुओं को मिलेगा जो कम से कम 200 वर्गमीटर भूमि पर स्थित हों। एक समय में एक ही टैंकर को कुएं से पानी भरने की अनुमति होगी। भूजल निकासी का रिकॉर्ड रखने के लिए छेड़छाड़-रोधी डिजिटल फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य होगा। लाइसेंस के बिना संचालन करने पर बिजली कनेक्शन काटने और उपकरण जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। - टैंकर संचालकों ने नियमों को बताया अव्यावहारिक टैंकर संचालकों का कहना है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में इन नियमों का पालन करना बेहद मुश्किल है। उनका तर्क है कि वे पीने का पानी नहीं, बल्कि सामान्य उपयोग का पानी उपलब्ध कराते हैं, इसलिए उन पर इतने कड़े नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है। फिलहाल हड़ताल समाप्त होने से मुंबईवासियों को राहत मिली है, लेकिन भूजल दोहन के नियमों और टैंकर व्यवसाय से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान अभी बाकी है। संजय/संतोष झा- १० जून/२०२६/ईएमएस