क्षेत्रीय
10-Jun-2026
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- अचीवर्स पब्लिक स्कूल ने छात्र के भविष्य को बनाया फुटबॉल, जिम्मेदार अधिकारी कब खोलेंगे आंखें? - शिकायत करने पहंुचा पालक। शाजापुर (ईएमएस)। शहर में शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले निजी स्कूल अब नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले बेलगाम अड्डे बनते जा रहे हैं, और जिला प्रशासन का जिम्मेदार अमला कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। ताजा मामला शहर के अचीवर्स पब्लिक स्कूल का सामने आया है, जहां प्रबंधन की घोर लापरवाही और प्रशासनिक अधिकारियों की सुस्ती ने मिलकर एक होनहार छात्र के पूरे करियर को अधर में लटका दिया है। हद तो इस बात की है कि एक ही स्कूल से पढ़े बच्चे की पांचवीं और आठवीं की मार्कशीट में अलग-अलग नाम दर्ज हैं। ताज्जुब की बात यह है कि स्कूल प्रशासन अपनी इस गंभीर गलती को सुधारने के बजाय अपनी तानाशाही पर उतारू है, और जिम्मेदार शिक्षा अधिकारी दफ्तरों में बैठकर केवल तमाशा देख रहे हैं। थक-हारकर पीडि़त परिवार को अब तपती धूप में कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अपनी ही गलती मानने में स्कूल की हठधर्मिता यह पूरा सनसनीखेज मामला छात्र काशिफ अब्बासी का है, जिसके पिता करीम खान ने बुधवार 10 जून 2026 को शाजापुर कलेक्टर के जन सामान्य विभाग में न्याय की गुहार लगाई है। दिए गए आवदेन में करीम खान ने बताया कि अचीवर्स पब्लिक स्कूल ने पांचवीं कक्षा की मार्कशीट तैयार करते समय छात्र, उसके पिता करीम खान और माता नगमा बी के नामों की स्पेलिंग का कचरा कर दिया था। जब परिजनों ने कोर्ट का एफिडेविट और पुख्ता दस्तावेज दिए, तो स्कूल ने अपनी गर्दन फंसती देख आठवीं की मार्कशीट में तो चुपचाप सुधार कर दिया, लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब पांचवीं की मार्कशीट सुधारने की बात आई। स्कूल प्रबंधन अब इस कदर हठधर्मिता और अकड़ पर अड़ा है कि वह पांचवीं का रिकॉर्ड सुधारने को तैयार नहीं है, जबकि पांचवीं की परीक्षा खुद इसी स्कूल ने घरेलू स्तर पर आयोजित की थी, इसमें किसी बाहरी बोर्ड का कोई लेना-देना नहीं था। दफ्तरों में बैठे जिम्मेदार अफसरों की खुली पोल इस पूरे घटनाक्रम ने शाजापुर के शिक्षा विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। सवाल यह उठता है कि प्राइवेट स्कूलों की इस मनमानी पर लगाम कसने वाले अधिकारी आखिर किस बात की मोटी तनख्वाह ले रहे हैं? क्या इन जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे अफसरों को यह दिखाई नहीं देता कि एक छोटी सी लिपिकीय त्रुटि के कारण किसी मासूम का पूरा भविष्य तबाह हो सकता है? यदि कल को इस नाम की विसंगति के कारण छात्र को किसी प्रतियोगी परीक्षा, स्कॉलरशिप या उच्च शिक्षा में प्रवेश से हाथ धोना पड़ा, तो क्या ये एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर फाइलें सरकाने वाले अधिकारी उसकी जिम्मेदारी लेंगे? स्कूल की इस खुलेआम मनमानी पर अब तक शिक्षा विभाग का मौन रहना साफ इशारा करता है कि या तो निचला सिस्टम पूरी तरह पंगु हो चुका है या फिर उनकी सांठगांठ बहुत गहरी है। कलेक्टर से सीधी कार्रवाई की उम्मीद पीडि़त पिता करीम खान ने कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर सीधे तौर पर इस लापरवाह सिस्टम को चुनौती दी है। उन्होंने साफ तौर पर मांग की है कि जब आठवीं की संशोधित मार्कशीट में नाम सही हो चुका है, तो पांचवीं की अंकसूची में तुरंत सुधार के सख्त आदेश दिए जाएं। अब देखना यह होगा कि शाजापुर के आला अधिकारी इस गंभीर मामले में अचीवर्स पब्लिक स्कूल के प्रबंधन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर इस शिकायत को भी अन्य सरकारी कागजों की तरह रद्दी के ढेर में दबा दिया जाता है। छात्र के भविष्य को खिलौना समझने वाले ऐसे बेलगाम शिक्षण संस्थानों पर अगर आज चाबुक नहीं चला, तो आने वाले समय में कई और मासूमों का भविष्य इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही की वेदी पर चढ़ा दिया जाएगा। ईएमएस/ राजेश कलजोरिया/ 10 जून 2026