रायपुर (ईएमएस)। राजधानी रायपुर पुलिस ने सुपरवाईजर से लूट की घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त (क्राईम एवं साईबर) स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) संदीप पटेल की सतत् मॉनिटरिंग में कमिश्नरेट की संयुक्त टीम द्वारा लगातार 72 घंटे के इंटर स्टेट ऑपरेशन, तकनीकी विश्लेषण के परिणामस्वरूप रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को मिली बड़ी सफलता। घटना का मास्टर माइंड गौरव तिवारी है जो अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने विगत 1.5 माह से की जा रहीं थी रेकी, योजनाबद्ध तरीके से दिया गया था घटना को अंजाम। आरोपी गौरव तिवारी पूर्व में क्रिकेट सट्टा के प्रकरण में जा चुका है जेल। अन्य आरोपियों के भी है आपराधिक प्रकरण। पुलिस ने बताया की घटना के तुरंत बाद आरोपियों ने बदला था अपना ठिकाना। म.प्र., बिहार, उ.प्र. एवं दिल्ली में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट की टीम द्वारा लगातार दी जा रहीं थी दबिश। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूट की नगदी रकम 7,00,000/- (सात लाख रूपये) तथा घटना में प्रयुक्त एक्टिवा वाहन क्रमांक सी जी 04 एम एच 5734 जप्त किया गया है। जानकारी के मुताबिक प्रार्थी श्रवण साहू ने थाना डी डी नगर में रिपोर्ट दर्ज कराया कि वह विशेष साह निवासी टाटीबंध आमानाका रायपुर के कंपनी में सुपरवाईजर का काम करता है। दिनांक 06.06.2026 को कंपनी के मालिक विशेष साह द्वारा प्रार्थी को बालाजी रोलिंग मिल के हेड ऑफिस, अग्रसेन चौक रायपुर से उधारी की राशि लाने हेतु भेजा गया था। प्रार्थी वहां से 10,26,500/- नगद राशि लेकर अपने बैग में रखकर डंगनिया बाजार स्थित एक ग्राहक के पास पहुंचा। शाम लगभग 07ः05 बजे डंगनिया बाजार में कार खड़ी कर वह बैग निकाल रहा था, तभी मोटर साइकिल सवार तीन अज्ञात व्यक्ति जो अपने चेहरे गमछे से ढके हुए थे, प्रार्थी को धक्का देकर उसके हाथ से बैग जिसमें 10,26,500/- नगद, बैंक की चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड एवं पैन कार्ड रखे थे, को लूट कर सुंदर नगर की ओर फरार हो गए। प्रार्थी की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध थाना डी डी नगर में अपराध क्रमांक 361/26 धारा 309(4), 3(5) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध किया गया। लूट की घटना को गंभीरता से लेते हुये पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला एवं अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले द्वारा तत्काल पुलिस उपायुक्त (क्राईम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) संदीप पटेल को अज्ञात आरोपियों की पतासाजी कर जल्द से जल्द गिरफ्तार करने निर्देशित किया गया। जिनकी मॉनिटरिंग में एण्टी क्राइम एवं साइबर यूनिट तथा थाना डी डी नगर पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। गठित टीमों द्वारा घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया तथा घटनास्थल से उपलब्ध सभी महत्वपूर्ण तथ्यों एवं साक्ष्यों का संकलन किया गया। जांच के दौरान एक टीम द्वारा प्रार्थी, घटनास्थल के आसपास उपस्थित लोगों तथा संबंधित कंपनी के संचालक विशेष शाह से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान घटना की परिस्थितियों, रकम के आवागमन, कर्मचारियों की भूमिका एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं के संबंध में जानकारी एकत्रित की गई। वहीं दूसरी टीम द्वारा घटनास्थल एवं उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्मता से परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। आरोपियों द्वारा घटना के बाद भागने हेतु जिन मार्गों का उपयोग किया गया था, उन सभी संभावित मार्गों को चिन्हित कर सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए। साथ ही घटना में प्रयुक्त दोपहिया वाहन की पहचान एवं उसके स्वामी का पता लगाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे थे। जांच के क्रम में तकनीकी विश्लेषण, कंपनी में कार्यरत सभी कर्मचारियों के रिकार्ड व हजारों सीसीटीव्ही फुटेज के बाद टीम द्वारा आरोपियों को चिन्हांकित किया गया व तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों का पीछा किया गया। प्रकरण में मुख्य आरोपी गौरव तिवारी से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह पहले से बालाजी कंपनी में पेमेंट लेन-देन हेतु जाता था। उसने यह जानकारी अपने अन्य 04 साथियों के साथ साझा की, कि अग्रसेन चौक स्थित बालाजी कॉर्पाेरेट ऑफिस से जो भी व्यक्ति बैग लेकर बाहर निकलता है, उसके बैग में प्रायः लाखों रुपये की नगदी रहती है। इसी जानकारी के आधार पर पांचों आरोपियों ने घटना से लगभग डेढ़ माह पूर्व लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई थी। आरोपियों ने बताया कि उनका कोई विशेष व्यक्ति टारगेट नहीं था। उनकी योजना यह थी कि कार्यालय से जो भी व्यक्ति नगदी से भरा बैग लेकर बाहर निकलेगा, उसे अपना शिकार बनाया जाएगा। इस उद्देश्य से आरोपियों द्वारा कार्यालय के आसपास लगातार कई दिनों तक रेकी की गई। रेकी के दौरान वे कार्यालय से बैग लेकर निकलने वाले व्यक्तियों पर नजर रखते थे तथा उनका पीछा भी करते थे, किंतु अवसर नहीं मिलने के कारण वे लूट की घटना को अंजाम देने में सफल नहीं हो पा रहे थे। घटना दिनांक को प्रार्थी नगदी रकम से भरा बैग लेकर कार्यालय से बाहर निकला। उस समय आरोपी कार्यालय के आसपास मौजूद थे और उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। प्रार्थी के कार्यालय से निकलते ही पांचों आरोपियों ने दो अलग-अलग दोपहिया वाहनों पर सवार होकर उसकी कार का पीछा करना शुरू कर दिया। आरोपियों ने पूरे रास्ते प्रार्थी की गतिविधियों पर नजर बनाए रखीं। जब प्रार्थी घटना स्थल पर पहुंचकर अपनी कार से नगदी रकम से भरा बैग लेकर नीचे उतरा, तभी पूर्व नियोजित योजना के तहत आरोपियों ने उसे निशाना बनाया और उसके कब्जे से नगदी से भरा बैग लूट लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। मुख्य आरोपी गौरव तिवारी की निशानदेही पर प्रकरण में संलिप्त आरोपी आशीष पाण्डेय उर्फ गोलू को उ.प्र. से गिरफ्तार किया गया। प्रकरण में अभी तक लूट की नगदी रकम कुल 7,00,000/- (सात लाख रूपये) तथा घटना में प्रयुक्त एक्टिवा वाहन क्रमांक सी जी 04 एम एच 5734 जुमला कीमती लगभग 7,50,000/- (सात लाख पचास हजार रूपये) बरामदगी की गई है। प्रकरण में फरार अन्य 03 आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु टीमें रवाना की गई है, शीघ्र ही उनकी गिरफ्तारी की जायेगी। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/10 जून 2026