- हर लॉक चैंबर 280 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा होगा, लागत करीब 11.4 अरब डॉलर बीजिंग,(ईएमएस)। चीन ने एक विशाल वॉटर वे प्रोजेक्ट शुरू किया है। जिसकी लागत करीब 11.4 अरब डॉलर है। यह शिप लॉक को दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड शिपलॉक माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत शुरू किया गया है। इस पंचवर्षीय योजना की पहली बड़ी राष्ट्रीय परियोजना भी है। नई योजना के तहत थ्री गोर्जेस बांध के पास मौजूदा शिप लॉक के पैरलर एक वॉटर वे बनाया जाएगा। इसमें दोहरी लाइन वाला पांच चरणों का बड़ा शिप लॉक सिस्टम होगा, जिसकी कुल लंबाई करीब 6.7 किलोमीटर होगी। इसके जरिए 10 हजार टन तक वजन वाले बड़े जहाज आसानी से गुजर सकेंगे। हर लॉक चैंबर 280 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा होगा। मीडिया रिपोर्ट में जानकारों के मुताबिक बताया कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ जहाजों की गिनती ही नहीं बढ़ाएगा, इससे यांग्त्जी नदी के किनारे बसे 11 राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा। यह क्षेत्र चीन की कुल आबादी और जीडीपी का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पैदा करता है। देश की टॉप 500 कंपनियों में से करीब 200 कंपनियां भी इसी इकोनॉमी कोरिडोर में हैं। ये वॉटर वे प्रोजेक्ट चीन की सबसे बड़ी और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी यांग्त्जी पर बना है। दरअसल, यांग्त्जी नदी चीन की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। इसके किनारे देश के कई बड़े औद्योगिक और व्यापारिक शहर बसे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में यहां माल ढुलाई इतनी तेजी से बढ़ी कि थ्री गोर्जेस बांध का मौजूदा शिप लॉक अपनी तय क्षमता से कहीं ज्यादा इस्तेमाल होने लगा, जिस सिस्टम को सालाना 10 करोड़ टन माल संभालने के लिए बनाया था, उसने यह लक्ष्य तय समय से 19 साल पहले ही हासिल कर लिया है। साल 2025 में इस मार्ग से 17.3 करोड़ टन माल की आवाजाही हुई। बढ़ते माल परिवहन के दबाव को देखते हुए चीनी सरकार ने थ्री गोर्जेस न्यू वॉटर वे प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य नदी के रास्ते होने वाले व्यापार और माल ढुलाई को कई गुना बढ़ाना है। बता दें थ्री गोर्जेस डैम ने चीन को बिजली उत्पादन और आर्थिक विकास में बड़ा फायदा पहुंचाया है, लेकिन इसकी शुरुआत से ही इसे लेकर कई विवाद और चिंताएं भी रही हैं। इस डैम के निर्माण के कारण 10 लाख से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगह बसना पड़ा। इसके अलावा वॉटर-बॉडी का आकार बढ़ने से कुछ इलाकों में भूस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ने की भी आशंका जताई गई है। सिराज/ईएमएस 11 जून 2026