राष्ट्रीय
11-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में आम लोगों का गुस्सा भयंकर हिंसा में बदल गया है, जहां पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की है। इस खूनी कहर के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से तुरंत दखल देने की मांग की है। गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे इलाकों में महंगाई, बेरोजगारी और बिजली बिलों से त्रस्त जनता लंबे समय से सड़कों पर थी, और अब यहां हर तरफ चीखें और मातम पसरा है। मोबाइल इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप कर दी गई हैं, जबकि अस्पतालों में घायलों की भरमार है। यह विवाद 5 जून, 2026 को शुरू हुआ, जब पीओजेके प्रशासन ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) नामक नागरिक समूह पर प्रतिबंध लगा दिया। जेएएसी पिछले दो साल से महंगाई, बिजली कटौती और आटे के बढ़ते दामों के खिलाफ आवाज उठा रहा था। उनकी कुल 38 मांगों में से एक 12 शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग थी, जिस पर प्रशासन अड़ा रहा। प्रशासन के जेएएसी पर प्रतिबंध लगाने के बाद, 6 जून को पुलिस झड़प में व्यापारी की मौत ने आग में घी का काम किया, जिससे पूरे क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। हालात तब और भयावह हो गए जब 8 जून को रावलाकोट में जेएएसी समर्थकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। आरोप है कि गोलियां सिर्फ हवा में नहीं, बल्कि सीधे प्रदर्शनकारियों के सीने और यहां तक कि अपने घरों में सो रहे लोगों पर भी चलाई गईं। इसके बाद पूरे पीओजेके में मोबाइल इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप कर दी गईं, जबकि घायलों के बारे में जानकारी छिपाने के लिए अस्पतालों पर भी कब्जा कर लिया गया। भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए यूएनएचआरसी से तत्काल दखल की मांग की है, ताकि क्षेत्र में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोका जा सके। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला ने भी पीओजेके में हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई है। जब तक संचार व्यवस्था बहाल नहीं होती, इस काली रात की पूरी सच्चाई सामने आना मुश्किल रहेगा। आशीष दुबे / 11 जून 2026