टोरंटो,(ईएमएस)। जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्ति की कगार पर खड़े ध्रुवीय भालुओं को आखिरी बार देखने के लिए पर्यटक कनाडा के चर्चिल शहर में लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। मैनिटोबा प्रांत में स्थित छोटा सा कस्बा, जिसे दुनिया की पोलर बीयर कैपिटल के नाम से जाना जाता है, कभी रेलवे, बंदरगाह और सैन्य प्रतिष्ठानों पर निर्भर था। इन सुविधाओं के बंद होने और रोजगार घटने से जब 900 की आबादी वाले शहर के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हुआ, तब इसने खुद को ध्रुवीय भालू पर्यटन के केंद्र के रूप में पहचाना। हडसन बे के किनारे स्थित यह इलाका हर साल सर्दियों में समुद्री बर्फ जमने का इंतजार करते हुए बड़ी संख्या में ध्रुवीय भालुओं को आकर्षित करता है। लोगों ने इस मौके को भुनाया और विशेष टुंड्रा वाहनों के जरिए पर्यटकों को इन भालुओं के प्राकृतिक आवास में ले जाने लगे। देखते ही देखते, चर्चिल दुनियाभर के वन्यजीव प्रेमियों का पसंदीदा गंतव्य बन गया। आज, यहां पोलर बीयर देखने के लिए पर्यटक 3,000 से 8,000 डॉलर (2 से 6 लाख) तक खर्च करते हैं, वहीं कुछ लग्जरी आर्कटिक सफारी पैकेजों की कीमत 25,000 डॉलर (लगभग 18 लाख रुपये) प्रति व्यक्ति तक पहुंच जाती है। यह पर्यटन चर्चिल की स्थानीय अर्थव्यवस्था को हर साल लाखों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। हालांकि, पर्यटन उद्योग की चमक के पीछे एक गंभीर और चिंताजनक सच छिपा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हडसन बे में समुद्री बर्फ लगातार कम हो रही है, जिस पर पोलर बीयर शिकार के लिए निर्भर रहते हैं। बर्फ के जल्दी पिघलने और देर से जमने के कारण उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा, जिससे उनकी सेहत, प्रजनन क्षमता और कुल आबादी पर गंभीर असर पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, 2016से 2021के बीच चर्चिल क्षेत्र के पोलर बीयरों की संख्या में 27 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, और 1980 के दशक की तुलना में उनकी आबादी लगभग आधी रह गई है। संरक्षण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं रुकी तो 2050 तक इन शानदार जीवों के लिए हालात और गंभीर हो सकते हैं। इसी चिंता के बीच, पर्यटन कंपनियां इस अनुभव को लास्ट चांस टूरिज्म या आखिरी मौका पर्यटन के रूप में प्रचारित कर रही हैं। दुनिया भर से लोग इस डर के साथ चर्चिल पहुंच रहे हैं कि शायद आने वाले सालों में प्राकृतिक वातावरण में ध्रुवीय भालुओं को देख पाना संभव न रहे। यह विडंबना ही है कि जिन जीवों का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है, उन्हीं को देखने के लिए लोगों की भीड़ और खर्च दोनों बढ़ते जा रहे हैं। आशीष/ईएमएस 12 जून 2026