अमेरिका को नहीं रहा पाकिस्तान पर भरोसा वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गंभीर सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि दोनों देशों के बीच एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक समझौता होने वाला है, जो अंतिम दौर में पहुंच चुका है। हालांकि, इस समझौते का श्रेय लेने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को झटका देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर पाकिस्तान की धरती पर नहीं होंगे, बल्कि इस अंतिम डील को यूरोप में फाइनल किया जाएगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कराने और इसका क्रेडिट लेने के प्रयास कर रहा था, और वहां पहले भी एक दौर की वार्ता पूरी तरह विफल हो चुकी थी। इस बीच, जहां ट्रंप इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे हैं, वहीं ईरान ने फिलहाल अमेरिकी दावे को सिरे से खारिज करते हुए ऐसी किसी भी डील से इनकार किया है। जब डोनाल्ड ट्रंप से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतभा खामेनेई इस समझौते के लिए पूरी तरह तैयार हो गए हैं, तो ट्रंप ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह अच्छी तरह जानते हैं कि ईरानी नेतृत्व का जवाब हां में ही है। ट्रंप के मुताबिक, इस नए समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने और परमाणु हथियारों को पूरी तरह से छोड़ने के लिए राजी हो गया है। अब वे न तो भविष्य में कोई परमाणु हथियार खरीदेंगे और न ही खुद अपनी तकनीक से इसे विकसित करेंगे। ट्रंप ने हालिया तनाव का जिक्र करते हुए यह भी माना कि पिछले कुछ दिनों में स्थितियां बेहद गंभीर और संवेदनशील हो गई थीं। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हिंसक घटनाक्रम हुआ, वे वास्तव में वैसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से कई बार कड़े हमले करना भी बेहद जरूरी हो जाता है। दरअसल, बीते तीन दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव अपने चरम पर पहुंच गया था, जहां पूर्व में हुए युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए दोनों ओर से ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे थे। लेकिन इन भीषण हमलों के बाद अचानक ट्रंप के रुख में नरमी देखी गई। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर कहा कि वे अब ईरान पर और अधिक सैन्य हमले नहीं करना चाहते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम इस बेहद पुख्ता आधार पर उठाया है क्योंकि ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता अब ईरानी नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच चुकी है और वहां से इस समझौते को पूरी तरह मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने संकेत दिए कि नाजुक मोड़ पर पहुंच चुके युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में बदलने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है, जिसे अमेरिका, इजरायल और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों ने भी अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। अमेरिका के इस यू-टर्न से पहले डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद आक्रामक था, जिसके चलते दुनियाभर के बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। ट्रंप ने ईरान को तबाह करने और उसके तेल उद्योगों पर पूरी तरह कब्जा कर लेने की खुली धमकी दी थी। ट्रंप के निशाने पर विशेष रूप से ईरान का खार्ग द्वीप था, जो कुवैत और सऊदी अरब में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के ठीक सामने फारस की खाड़ी के दूसरे छोर पर स्थित है। यह द्वीप ईरान के तेल उद्योग की असली जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के माध्यम से होता है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में खुलकर स्वीकार किया था कि ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करना हमेशा से उनकी सर्वोच्च सैन्य प्राथमिकता रही है, लेकिन वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि अमेरिका इसके लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति या इतना बड़ा जोखिम उठाने का साहस रखता है या नहीं। अब इस तनातनी के बीच समझौते की खबर ने वैश्विक बाजार को बड़ी राहत दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/12जून2026