क्षेत्रीय
12-Jun-2026
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- गुजरात कारागार विभाग की अनूठी पहल : मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, बंदियों को कारागार में ही मिलेगी बारहवीं तक शिक्षा अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात राज्य के कारागार एवं सुधारात्मक प्रशासन विभाग द्वारा कारागारों में सजा भुगत रहे बंदियों तथा उनके परिवारों के उत्थान के लिए एक अत्यंत सराहनीय और मानवीय पहल की गई है। गत 11 जून 2026 को अहमदाबाद केंद्रीय कारागार में “एक नई उम्मीद” योजना के अंतर्गत एक विशेष प्रोत्साहन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों तथा उनके बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन प्रदान करना था। वर्ष 2026 में दसवीं, बारहवीं तथा उच्च शिक्षा की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले राज्य की विभिन्न कारागारों में निरुद्ध बंदियों के कुल 18 मेधावी बच्चे अपने परिजनों के साथ इस अवसर पर उपस्थित रहे। गुजरात राज्य के कारागार प्रमुख पुलिस महानिदेशक डॉ. के. एल. एन. राव के करकमलों से इन सभी विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ. राव ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए “एक नई उम्मीद” योजना के विभिन्न लाभों की विस्तृत जानकारी दी तथा बंदियों और उनके परिवारों को शिक्षा एवं आत्मविकास के लिए प्रेरित किया। बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसी कार्यक्रम के दौरान अहमदाबाद केंद्रीय कारागार में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत अब कारागार में निरुद्ध बंदी बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा कारागार परिसर में रहकर ही पूर्ण कर सकेंगे। जिन बंदियों की शिक्षा किसी कारणवश बीच में छूट गई थी, वे अब किसी भी कक्षा से पुनः अध्ययन आरंभ कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त भविष्य में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान द्वारा बंदियों के लिए विभिन्न व्यावसायिक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएंगे, जो कारागार से रिहाई के बाद उनके पुनर्वास और रोजगार प्राप्ति में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। इस संपूर्ण अभिनव पहल एवं कार्यक्रम का आयोजन गुजरात कारागार विभाग के प्रमुख पुलिस महानिदेशक डॉ. के. एल. एन. राव तथा उप महानिरीक्षक राकेश पी. बारोट के सक्षम मार्गदर्शन में अहमदाबाद केंद्रीय कारागार के अधीक्षक गौरव अग्रवाल के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। समाज के वंचित वर्गों के बच्चों तथा बंदियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. के. एल. एन. राव द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में आरंभ की गई इस नई पहल की विभिन्न स्तरों पर व्यापक सराहना की जा रही है। यह प्रयास न केवल शिक्षा को बढ़ावा देने वाला है, बल्कि बंदियों और उनके परिवारों के जीवन में नई आशा, आत्मविश्वास और सम्मान का संचार करने वाला भी सिद्ध हो रहा है। सतीश/12 जून