क्षेत्रीय
12-Jun-2026
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अशोकनगर (ईएमएस)। महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक अपने दो सहकर्मियों के निलंबन और एक को नोटिस जारी होने के विरोध में उतर आई हैं। शुक्रवार को जिले की सुपरवाइजरों ने भ्रष्टाचार से संबंधित समाचारों की प्रदर्शनी लगाकर अनोखे ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों ने आरोप लगाया कि जिले में भ्रष्टाचार की सैकड़ों खबरें प्रकाशित होने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि, उनके खिलाफ केवल शिकायतों के आधार पर बिना निष्पक्ष जांच और उनका पक्ष सुने तत्काल दंडात्मक कदम उठाए गए हैं। निलंबित पर्यवेक्षक रचना राठौर ने बताया कि उनके खिलाफ चिरवास की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा अहिरवार ने शिकायत की थी। एसडीएम मुंगावली ने मामले की जांच की, लेकिन उनका बयान नहीं लिया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 8 जून को प्रतिवेदन तैयार हुआ और अगले ही दिन जिला पंचायत सीईओ ने उनका पक्ष सुने बिना उन्हें निलंबित कर दिया। राठौर का कहना है कि शिकायतकर्ता कार्यकर्ता के विरुद्ध पहले कार्रवाई की गई थी, जिसके कारण वह द्वेषवश शिकायत कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पैसों के लेनदेन का आरोप है, वे वर्ष 2024 में हर घर तिरंगा अभियान के तहत झंडे खरीदने के लिए विभागीय निर्देश पर लिए गए थे। कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग: ईसागढ़ की महिला पर्यवेक्षक चंचल अहिरवार ने भी अपने खिलाफ शिकायतों को दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी भवन में परिवार सहित रह रही थी और वहीं दुकान भी चला रही थी, जिसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई थी। अहिरवार ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा कार्रवाई की अनुशंसा करने के बाद उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कराई गईं। वहीं, नोटिस प्राप्त पर्यवेक्षक रजनी बालू ने आरोप लगाया कि गहोरा गांव के एक स्व-सहायता समूह को बहाल कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि समूह के संचालन में गंभीर कमियां थीं, जिन्हें कलेक्टर के निरीक्षण में भी पाया गया था। इसके बावजूद कार्रवाई न करने के लिए दबाव और धमकियां दी जा रही थीं। सुपरवाइजरों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उनका पक्ष सुने जाने तथा भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। ईएमएस/ ओमप्रकाश रघुवंशी/ 12 जून 2026