नरसिंहपुर (ईएमएस)। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. सुनील बृजपुरिया ने बताया कि बरसात के मौसम में पशुओं को बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के सीजन में गलघोटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी जानलेवा बीमारियां पशुओं में तेजी से फैलती हैं, जिससे पशुओं की मृत्यु तक हो सकती है। इन बीमारियों का सीधा असर पशुओं के दुग्ध उत्पादन और उनकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। उपसंचालक डॉ. बृजपुरिया ने बताया कि गलघोटू बीमारी में पशु को तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ और गले में सूजन हो जाती है। वहीं लंगड़ा बुखार के कारण पैरों में सूजन, तेज बुखार और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी होती है। खुरपका-मुंहपका रोग पशुओं की उत्पादन क्षमता को सीधा प्रभावित करता है, जबकि लंपी स्किन डिजीज के कारण शरीर पर गांठें बन जाती हैं और पशु लंबे समय तक बीमार रहता है। उन्होंने बताया कि अपने पशुओं को समय रहते टीका लगवाना ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। विशेषज्ञों के अनुसार हर वर्ष बारिश शुरू होते ही संक्रामक रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद अनेक पशुपालक टीकाकरण को लेकर लापरवाही बरतते हैं, जिसका खामियाजा बाद में पूरे पशुधन को भुगतना पड़ता है। वर्तमान में जिले में गलघोटू और लंगड़ा बीमारी से बचाव के लिए सघन टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। खुरपका व मुंहपका- एफएमडी बीमारी से बचाव के लिए वर्तमान में जिले में विशेष टीकाकरण किया जा रहा है। गलघोटू और लंगड़ा बुखार के टीके वर्ष में एक बार, जबकि एफएमडी का टीका हर छह महीने में लगाना जरूरी है। ब्रूसेलोसिस से बचाव के लिए 4 से 8 माह की मादा बछियों को जीवन में एक बार टीका लगाया जा रहा है। टीकाकरण की ऑनलाइन एंट्री भारत पशुधन ऐप में ओटीपी के माध्यम से दर्ज की जा रही है। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के समस्त पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और मानसून की बारिश शुरू होने से पहले नजदीकी पशु चिकित्सालय या कृत्रिम गर्भाधान केंद्र से संपर्क कर अपने गोवंश और भैंस वंशीय पशुओं का टीकाकरण अनिवार्य रूप से करवाएं। ईएमएस/ राहुल वासनिक/ 12 जून 2026