*श्याम मोहन उपाध्याय/रोमेश रंजन दुबे* लालगंज (ईएमसस)। क्षेत्र के दीवानपुर स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथावाचक धरम जी महाराज ने सीता-राम विवाह के बाद जनकपुर से अयोध्या वापसी का प्रसंग सुनाया। कथा में भगवान श्रीराम, माता सीता सहित चारों भाइयों और उनकी अर्धांगिनियों के अयोध्या प्रस्थान का भावपूर्ण वर्णन किया गया।कथावाचक ने कहा कि विवाह उपरांत राजा जनक ने सम्मानपूर्वक बारात को विदा किया। अयोध्या नरेश महाराज दशरथ ने महर्षियों और संतों को अग्रभाग में रखकर पुत्रों, परिजनों एवं सेवकों के साथ राजधानी की ओर प्रस्थान किया।उन्होंने कहा कि यह प्रसंग भारतीय संस्कृति में संतों के सम्मान, पारिवारिक मर्यादा और आदर्श राजधर्म का प्रतीक है।धरम जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन विनम्रता, आज्ञाकारिता और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विवाह के बाद भी कुल परंपराओं और पुत्र धर्म का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। वहीं महाराज दशरथ ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि राज्य संचालन में संतों और विद्वानों का मार्गदर्शन सर्वोपरि होना चाहिए।उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में सुख-शांति बनाए रखने के लिए बड़ों का सम्मान, गुरुजनों का आदर तथा संस्कारों का पालन आवश्यक है।रामकथा का प्रत्येक प्रसंग मानव जीवन को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करता है।कथा के समापन पर मुख्य यजमान जयंती प्रसाद पांडे एवं गया प्रसाद पांडे ने आरती की। आयोजन समिति के नवीन तिवारी, अशोक तिवारी और राम तिवारी सहित अन्य कार्यकर्ता व्यवस्था में जुटे रहे। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। ईएमएस/मोहने/ 12 जून 2026