रांची(ईएमएस)।कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने शुक्रवार को राजधानी में पांच राज्यों (झारखंड, बिहार, प बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा) में वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी फसल के समर्थन मूल्य को लेकर सुनवाई की।इसमें पं बंगाल छोड़ सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बंगाल के प्रतिनिधि ऑन लाइन शामिल हुआ। झारखंड ने इसमें गेहूं के लिए 3759 रुपये समर्थन मूल्य की मांग की।चना के लिए 5927 तथा मसूर के लिए 7059 रुपये की मांग की। मौके पर आयोग के अध्यक्ष ए गणेश कुमार ने सभी राज्यों का पक्ष सुनने के बाद कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने का एक प्रक्रिया है।उसी के तहत एमएसपी तय होता है. पूर्वी राज्यों की समस्या कुछ अलग है। यहां ग्रामीण क्षेत्र अभी भी बहुत समृद्ध नहीं है। कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन की सुविधा नहीं है।कुछ गांवों को मिलाकर वैल्यू एडिशन की सुविधा विकसित की जा सकती है।इससे किसान समृद्ध होंगे। गांवों को सड़क, परिवहन आदि की सुविधा से जोड़ना होगा। गांव के उत्पादों की ब्रांडिंग होनी चाहिए. इससे किसानों के उत्पाद अधिक मूल्य के हो जायेंगे।गांव में ही उद्यम विकसित करना होगा।मौके पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि कृषि के मामले में झारखंड को अन्य राज्यों के नजरिये से देखने की जरूरत नहीं है।इसके लिए अलग नजरिया होना चाहिए।झारखंड बदल रहा है। किसानों को समृद्ध करने के लिए चल रही राज्य और केंद्र की योजनाओं का संचालन भी बेहतर हो रहा है।इसके बावजूद मैकनाइजेशन में राष्ट्रीय औसत से कम है। सिंचाई की सुविधा भी 20 से 25 फीसदी जमीन पर ही है।राज्य में अलग-अलग क्षेत्र की अलग-अलग समस्या है। अपने खर्च से राज्य सरकार किसानों को सोलर पंप दे रही है। बीएयू के वैज्ञानिक डॉ एस कर्मकार ने कहा कि यहां रागी का उत्पादन तो रहा है। लेकिन, बाजार नहीं मिला तो मिलेट मिशन पर असर पड़ेगा। डॉ बीके झा ने कहा कि जितने एमएसपी की मांग हो रही है, वह तो वर्तमान मुद्रास्फिति से होने वाली कमी को भी पूरा नहीं कर पायेगी। डॉ डीके रुसिया ने कहा कि झारखंड की टोपोग्राफी अलग है।इस कारण किसानों को उपज की लागत अधिक हो जाती है।मौके पर समेति के निदेशक विकास कुमार ने झारखंड का पक्ष रखा। स्वागत भाषण कृषि निदेशक बिद्यानंद शर्मा पंकज ने किया। मौके पर बिहार, झारखंड, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसानों ने भी विचार रखा। कार्यक्रम में कृषक समृद्धि योजना व खेत बचाओ योजना का फिल्म प्रदर्शित किया गया।सुनवाई के दौरान आयोग के प्रेमचंद और सायरिक जॉर्ज भी मौजूद थे। कर्मवीर सिंह/12जून/26