पर, आर्थिक स्वतंत्रता में अब भी बड़ी चुनौती नई दिल्ली(ईएमएस)। महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद सामाजिक पहुंच और आर्थिक स्वतंत्रता के संकेतकों के बीच की खाई लगातार चौड़ी हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के पिछले एक दशक के तीन चरणों (एनएफएचएस-4, एनएफएचएस-5 और एनएफएचएस-6) के तुलनात्मक विश्लेषण से यह महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। रिपोर्ट से पता चलता है कि जिन क्षेत्रों में सरकार सीधे तौर पर नीतियों के जरिए प्रभाव डाल सकती है, वहां महिलाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनमें वित्तीय समावेशन, डिजिटल पहुंच, स्कूली शिक्षा, मासिक धर्म स्वच्छता और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी जैसे मोर्चे शामिल हैं। हालांकि, इसके उलट काम के बदले उचित भुगतान और संपत्ति के मालिकाना हक जैसे मुख्य आर्थिक मामलों में महिलाओं को अब भी कोई खास फायदा नहीं मिल सका है। हाल ही में जारी एनएफएचएस-6 (2023-24) के आंकड़ों की तुलना एनएफएचएस-5 (2019-21) और एनएफएचएस-4 (2015-16) से करने पर यह स्पष्ट होता है कि भारत ने महिलाओं की क्षमताओं और संसाधनों तक उनकी पहुंच का विस्तार करने में तो तेजी से प्रगति की है, लेकिन उनके वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण की रफ्तार इसके मुकाबले काफी धीमी रही है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे बेहतरीन सुधार वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में देखा गया है। अपना खुद का बचत बैंक खाता रखने वाली 15 से 49 वर्ष की महिलाओं की हिस्सेदारी साल 2015-16 में मात्र 53 फीसदी थी, जो 2019-21 में बढ़कर 78.6 फीसदी और नवीनतम सर्वेक्षण (2023-24) में रिकॉर्ड 89 फीसदी पर पहुंच गई। इस प्रकार एक दशक के दौरान महिलाओं के बैंक खातों में 36 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। डिजिटल क्रांति के इस दौर में महिलाओं की तकनीकी पहुंच भी तेजी से बढ़ी है। अपना निजी मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं की संख्या 2015-16 में 45.9 फीसदी थी, जो बढ़कर 2019-21 में 53.9 फीसदी और अब 63.6 फीसदी हो गई है। इसी तरह इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं के आंकड़ों में भी जबरदस्त उछाल आया है, यह हिस्सेदारी पिछले सर्वेक्षण के 33.3 फीसदी से दोगुनी होकर अब 64.3 फीसदी तक पहुंच गई है। शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर सुधार जारी है, जहां स्कूल जाने वाली छह वर्ष और उससे अधिक उम्र की लड़कियों का अनुपात एनएफएचएस-4 के 68.8 फीसदी से सुधरकर अब एनएफएचएस-6 में 73.7 फीसदी हो गया है। वीरेंद्र/ईएमएस 13 जून 2026