राष्ट्रीय
13-Jun-2026
...


-लेख लिखकर बढ़ते भेदभाव और विभाजनकारी माहौल पर जताया दुख नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने देश में बढ़ते भेदभाव और विभाजनकारी माहौल पर गहरा दुख जाहिर किया है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता थरूर ने लिखा कि जब किसी देश को धीरे-धीरे अपनी आत्मा खोते हुए महसूस किया जाता है, तब एक गहरा और टीस भरा दुख होता है। जो लोग भारत को अनेकता में एकता के शानदार समावेशी प्रयोग के तौर पर देखते आए हैं, उन्हें हाल के वर्षों में निराशा मिली है। उनका मानना है कि कभी-कभी कोई एक घटना रोजमर्रा की राजनीति के शोर-शराबे को चीरकर हमारे नैतिक पतन की गहराई को उजागर करती है। ऐसी ही एक घटना हाल ही में सामने आई, जिसकी हेडलाइन थी कि होटल से बाहर निकाला गया अल्पसंख्यक बीजेपी नेता। यह घटना सज्जाद यूसुफ शाह से जुड़ी है, जो भाजपा के जम्मू-कश्मीर मीडिया सह-प्रभारी हैं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में यात्रा के दौरान बीजेपी नेता शाह को होटल से यह कहकर जाने को कहा गया कि उनकी मुस्लिम और कश्मीरी पहचान समस्याग्रस्त है। कांग्रेस नेता थरूर ने सवाल किया कि भारत के सबसे प्रगतिशील राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में ऐसा कैसे हो सकता है? शशि थरूर ने गंभीर आत्ममंथन का आह्वान कर कहा, हमें आइने में देखना चाहिए और खुद से एक सीधा, दुखद सवाल पूछना चाहिए, हम किस हाल में पहुंच गए हैं? उन्होंने तर्क दिया कि किसी महान सभ्यता को उसकी जीडीपी ग्रोथ या रक्षा ताकत से नहीं, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि वह अपने सबसे कमजोर लोगों और अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव करती है। कांग्रेस नेता थरूर ने कहा कि इस घटना का उपयोग छोटी-मोटी राजनीतिक बढ़त के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक आत्ममंथन के मौके के तौर पर होना चाहिए, ताकि हम नफरत की राजनीति को नकार सकें और सभी को साथ लेकर चलने वाली विविधता को फिर से अपना सकें, जिसने कभी हमारी पहचान बनाई थी। कांग्रेस नेता थरूर ने विडंबना जाहिर की कि सत्ताधारी पार्टी के लिए काम करने वाला व्यक्ति भी उन्हीं पूर्वाग्रहों का शिकार हुआ, जो उसकी पार्टी की बयानबाजी से पैदा हुए हैं। जब भेदभाव संस्थागत हो जाता है, तब वह राजनीतिक वफादारी नहीं देखता,बल्कि सीधे पहचान को निशाना बनाता है। उन्होंने भारत की पहचान रहे अतिथि देवो भव और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे गहरे सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेता ने कहा कि एक मुस्लिम नागरिक का अतिथि के तौर पर भी सुरक्षित रूप से होटल का कमरा किराए पर नहीं ले पाना बेहद दुखद है। यह सिर्फ एक कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि गहरी समस्या का लक्षण है, जहां भेदभाव रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस नेता थरूर ने सत्ताधारी भाजपा को अपनी नीतियों पर सोचने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावी फायदे के लिए ध्रुवीकरण को हथियार बनाना एक ऐसा राक्षस पैदा करता है जो आखिरकार अपने बनाने वालों के ही काबू से बाहर हो जाता है। ऐसी बयानबाजी का असर आम लोगों तक पहुंचता है, जो सामाजिक स्थिरता को कमजोर करता है। थरूर ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे महान मुसलमानों और सच्चे भारतीयों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अपनी ही आने वाली पीढ़ियों को अपने ही देश में अनचाहे अजनबी जैसा महसूस कराना एक बहुत बड़ी नैतिक विफलता है। यह ढांचागत और सामाजिक अलगाव इंसान की गरिमा को कमजोर करता है और मिल-जुलकर नागरिक होने की खुशी की जगह बेचैनी और बचाव की भावना पैदा करता है जो धीरे-धीरे सब कुछ खत्म कर देती है। आशीष दुबे / 13 जून 2026