अंतर्राष्ट्रीय
13-Jun-2026


इस्लामाबाद (ईएमएस)। आर्थिक तंगहाली के भयंकर दौर से गुजर रहे पाकिस्तान की हालत अब बद से बदतर हो गई है। पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े बेहद चिंताजनक तस्वीर दिखाते हैं। देश में एक ओर गरीबी ने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने भविष्य की नींव, बच्चों की शिक्षा के बजट में भारी कटौती की है। सर्वेक्षण के मुताबिक, पाकिस्तान में राष्ट्रीय गरीबी दर बढ़कर 28.9 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि शिक्षा पर होने वाला खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र 0.8 प्रतिशत रह गया है, जो कि बीते वर्ष 1.5 प्रतिशत था। बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। 2018-19 में जहाँ प्रति व्यक्ति मासिक गरीबी रेखा 3,757 रुपये थी, वह अब बढ़कर 8,484 रुपये हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से खराब हुई है, जहाँ गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि शहरी इलाकों में भी यह 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है। प्रांतीय स्तर पर, बलूचिस्तान 47 प्रतिशत आबादी के साथ सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है, जिसके बाद खैबर पख्तूनख्वा (35.3 प्रतिशत), सिंध (32.6 प्रतिशत) और पंजाब (23.3प्रतिशत) का नंबर आता है। रिपोर्ट आय असमानता में खतरनाक वृद्धि भी दर्शाती है, जहाँ गिनी गुणांक 28.4 से बढ़कर 32.7 हो गया है। शिक्षा क्षेत्र में कटौती के आंकड़े और भी भयावह हैं। वित्त वर्ष 2025 में शिक्षा पर सरकारी खर्च 1,251 अरब रुपये से घटकर 962 अरब पाकिस्तानी रुपये रह गया है। इसका सीधा असर साक्षरता दर पर दिख रहा है, जो अभी भी मात्र 63 प्रतिशत है, और महिलाओं में तो यह केवल 54 प्रतिशत है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश में अभी भी लगभग एक-तिहाई बच्चे स्कूल से बाहर हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है; पूरे पाकिस्तान में केवल 59 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में बिजली उपलब्ध है, और बलूचिस्तान में यह आंकड़ा मात्र 21 प्रतिशत है। सर्वेक्षण ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव, जहाँ से पाकिस्तान को लगभग 55 प्रतिशत विदेशी मुद्रा (रेमिटेंस) मिलती है, स्थिति को और बिगाड़ सकता है। आशीष दुबे / 13 जून 2026