राज्य
13-Jun-2026


* भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी के बीच मुकेश गुजराती के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल; अवैध बस्तियों और नागरिकता जांच की मांग पर छिड़ी बहस सूरत (ईएमएस)| शहर के नासिरनगर स्थित झुग्गी बस्ती में हुए कथित फर्जी डिमोलिशन का मामला अब राजनीतिक रूप से बेहद गर्मा गया है। इस पूरे प्रकरण में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में भारी उथल-पुथल मची हुई है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ भाजपा के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के ही एक फायरब्रांड नेता के बयान ने सोशल मीडिया पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। गुजरात भाजपा प्रदेश बूथ मैनेजमेंट सेल के संयोजक मुकेश गुजराती की एक सोशल मीडिया पोस्ट फेसबुक पर वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। मुकेश गुजराती ने अपने फेसबुक पोस्ट में डिमोलिशन का विरोध करने वालों पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा कि, “जिन लोगों को यह डिमोलिशन गलत लगता है, वे अपनी निजी संपत्ति पर झोपड़ियां बनाकर ऐसे लोगों को रहने की जगह दे दें।” उन्होंने आगे कहा कि अवैध झुग्गियों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, इस पूरे विरोध प्रदर्शन के पीछे कुछ तत्व केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा नेता ने नासिरनगर में प्रशासन द्वारा किए गए अथवा कथित तौर पर किए गए डिमोलिशन को सिद्धांततः उचित ठहराया है। हालांकि, उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग भी की है। मुकेश गुजराती ने क्षेत्र की आबादी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन और पुलिस को यह जांच करनी चाहिए कि वहां रहने वाले कितने लोगों के पास भारतीय नागरिकता के वैध दस्तावेज हैं और कितने लोग कथित रूप से अवैध रूप से घुसपैठ कर रहने वाले बांग्लादेशी नागरिक हैं। भाजपा नेता की इस विवादास्पद पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सूरत की राजनीति और डिजिटल मंचों पर इस मुद्दे को लेकर दो स्पष्ट धड़े बन गए हैं। एक वर्ग मुकेश गुजराती के राष्ट्रवादी रुख और कथित घुसपैठियों की जांच की मांग का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग और विपक्षी दल इसे आगामी चुनावों से पहले जानबूझकर किया जा रहा धार्मिक ध्रुवीकरण बता रहे हैं। फिलहाल, नासिरनगर डिमोलिशन विवाद को लेकर सियासी घमासान जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे के और अधिक तूल पकड़ने की संभावना जताई जा रही है। सतीश/13 जून