:: विधिक साक्षरता शिविर : हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति जस्टिस विवेक रुसिया बोले- समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी :: इंदौर (ईएमएस)। न्याय की सार्थकता तभी है, जब वह समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी सहजता से पहुंचे। श्रवण एवं वाक् बाधित (मूक-बधिर) समुदाय सहित हर दिव्यांगजन को समाज में सम्मान, समान अवसर और अदालतों तक निर्बाध पहुंच दिलाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। विधिक साक्षरता ही वह माध्यम है, जो इन विशेष शक्तियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएगी। यह विचार मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने व्यक्त किए। अवसर था मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मूक-बधिर समुदाय को कानूनी रूप से जागरूक करने के लिए आयोजित राज्यव्यापी विधिक साक्षरता शिविर “अनुगूंज” का। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस अनूठे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण यूट्यूब पर किया गया, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी 55 जिलों में एक साथ यह शिविर आयोजित हुआ। :: समान अवसर हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार :: कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने कहा कि न्याय तक सुलभ पहुंच प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। मध्यप्रदेश में मूक-बधिरों को विधिक सहायता दिलाने के लिए लगातार हो रहे सार्थक प्रयास न्यायपालिका की एक विशेष उपलब्धि हैं। इस दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने प्राधिकरण द्वारा चलाई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी। दिव्यांगजन विभाग के आयुक्त अजय खेमरिया ने दिव्यांगों के सामाजिक समावेशन और उनके समग्र विकास की योजनाओं पर प्रकाश डाला। :: संवाद में संवेदनशीलता और स्वास्थ्य के लिए योग जरूरी :: शिविर में केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक विषयों पर भी चर्चा हुई। एमसीपीसी की सीनियर ट्रेनर अनुजा सक्सेना ने मूक-बधिर व्यक्तियों के साथ प्रभावी संवाद और संवेदनशील व्यवहार के महत्व के साथ-साथ मध्यस्थता प्रक्रिया की खूबियां बताईं। वहीं, योग विशेषज्ञ डॉ. पराग जैन ने बताया कि नियमित योगाभ्यास से दिव्यांगजन भी अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ कर जीवन की गुणवत्ता बेहतर कर सकते हैं। :: इंदौर जिला न्यायालय में जुटे 115 से अधिक प्रतिभागी :: इंदौर में इस राज्यव्यापी कार्यक्रम की कमान जिला न्यायालय परिसर स्थित सभागार में दिखी। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजय श्रीवास्तव के निर्देशन व सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवराज सिंह गवली के मार्गदर्शन में स्थानीय स्तर पर गरिमामय आयोजन हुआ। इंटरप्रेटर्स ने आसान बनाई राह : शिविर की सबसे खास बात यह रही कि इसमें करीब 115 मूक-बधिर प्रतिभागी शामिल हुए। उनके और कानून के दिग्गजों के बीच संवाद की दूरी को पाटने के लिए पेशेवर इंटरप्रेटर्स रश्मीत कौर, टीम लीडर अतुल राठौर और प्रशिक्षित मध्यस्थों ने सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) में पूरी कार्यवाही समझाई। कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश डी.पी. मिश्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक सिंह तथा जिला विधिक सहायता अधिकारी (उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति) दीपक शर्मा सहित न्यायालयीन स्टाफ उपस्थित रहा। शिविर के अंत में प्रतिभागियों के कानूनी सवालों के जवाब देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। मूक-बधिर भाई-बहनों ने इस प्रयास को बेहद उपयोगी बताते हुए प्रशासन से ऐसे आयोजन लगातार करने की इच्छा जताई। प्रकाश/13 जून 2026