नई दिल्ली (ईएमएस)। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से 9 तक संस्कृत को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में चुनने का विकल्प भी दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का कहना है, इस निर्णय का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और भाषाई विरासत से छात्रों को जोड़ना है। संस्कृत के अध्ययन से भाषा कौशल, व्याकरण की समझ और प्राचीन साहित्य के प्रति रुचि विकसित होगी। इस निर्णय का विभिन्न शिक्षाविदों ने स्वागत किया है. जबकि कुछ विशेषज्ञों ने विद्यालयों में पर्याप्त संस्कृत शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर जोर दिया है। देश के विद्यालयों में संस्कृत के शिक्षकों की भारी कमी है.ऐसी स्थिति में संस्कृत की पढ़ाई कैसे हो सकेगी एसजे/ 14 जून /2026