क्षेत्रीय
15-Jun-2026
...


हरदा (ईएमएस)। मठ, मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी प्राचीन पाण्डुलिपियाँ विद्यमान है। हमारी सांस्कृतिक स्मृतियां, ज्ञान, परम्पराएं, विज्ञान और दर्शन पाण्डुलिपियों के रूप में अभी तक संरक्षित है।कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कहा कि इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी हैं। इस अमूल्य विरासत के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान भारतम् मिशन की शुरूआत की गई है, जिसके अंतर्गत वर्ष 1950 से पहले की पाण्डुलिपियों का डिजिटल रूप से संरक्षण किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों और शैक्षणिक व शोध संस्थाओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर, भोजपत्र, पोथियों आदि के रूप में विद्यमान पाण्डुलिपियों का संरक्षण होना है। हरदा जिला एतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक रूप से समृद्ध है, यहां धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई परिवारों अथवा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के पास भी पाण्डुलिपियाँ विद्यमान होने की संभावना है। हमारे देश की परम्परा को सुरक्षित रखने के इस राष्ट्रीय अभियान में सभी से सक्रिय भागीदारी निभाने की अपेक्षा है। पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिये जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति द्वारा ज्ञान भारतम् मोबाइल एप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण और उनकी अपलोडिंग की जा रही है। प्राचीन पाण्डुलिपि धारकों से आग्रह किया गया है कि वे उनके पास संरक्षित इस अमूल्य धरोहर का संरक्षण करने में अपना सहयोग प्रदान करें। साथ ही उपलब्ध पाण्डुलिपियों का डिजीटल संरक्षण अवश्य कराएं। ईएमएस/मोहने/ 15 जून 2026