16-Jun-2026


- 10 लाख से अधिक अपात्र लाभार्थी मिले - सरकार लागू करेगी केवायसी - सरकार का हर महीने करीब 800 करोड़ रुपये का खर्च बेंगलुरु (ईएमएस)। कर्नाटक सरकार ने गृह लक्ष्मी योजना की समीक्षा के बाद अब अपनी एक और अत्यंत लोकप्रिय गृह ज्योति योजना का व्यापक ऑडिट शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत राज्य के पात्र घरेलू परिवारों को हर महीने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाती है। पिछले छह महीनों से चल रही आंतरिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 10 लाख से अधिक ऐसे लोग इस योजना का गलत लाभ उठा रहे हैं, जो कर्नाटक के पंजीकृत मतदाता ही नहीं हैं। इसके साथ ही जांच में यह भी सामने आया है कि कई लाभार्थी एक से अधिक घरेलू आरआर (रेवेन्यू रजिस्टर) नंबरों पर मुफ्त बिजली की सब्सिडी का दोहरा लाभ ले रहे हैं। इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आने के बाद राज्य की गारंटी योजना क्रियान्वयन प्राधिकरण ने बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों की पहचान की है और सरकार से पात्रता नियमों को कड़ाई से लागू करने की सिफारिश की है। तय नियमों के मुताबिक, इस योजना का लाभ केवल कर्नाटक के मूल मतदाताओं को ही मिलना चाहिए और एक व्यक्ति सिर्फ एक ही डोमेस्टिक आरआर नंबर पर मुफ्त बिजली पा सकता है। इस योजना का गलत लाभ उठाने वालों को बाहर करने के लिए सरकार अब सभी लाभार्थियों का नए सिरे से सत्यापन करने जा रही है, जिसके लिए अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके जरिए यह जांचा जाएगा कि संबंधित आरआर नंबर वास्तव में आवासीय उपयोग के लिए ही है और उसका इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति कर्नाटक का वैध मतदाता है। इस मामले पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि ये योजनाएं बाहरी लोगों के लिए नहीं हैं और जो लोग यहां मतदान नहीं करते, उन्हें राज्य सरकार के खजाने से यह सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दिनेश गुलीगौड़ा ने बताया कि कई परिवार घरेलू बिजली के अलावा बोरवेल या पानी के पंपों के लिए अलग से अलॉट आरआर नंबरों पर भी मुफ्त बिजली ले रहे थे, जबकि यह योजना केवल विशुद्ध घरेलू उपयोग के लिए है। इतना ही नहीं, कुछ लोग आवासीय परिसरों से कमर्शियल गतिविधियां चलाकर वहां भी इस सब्सिडी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तमाम गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने की पूरी तैयारी कर चुकी है। वर्तमान में कर्नाटक में लगभग 1.7 करोड़ उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जिस पर सरकार हर महीने करीब 800 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी खर्च कर रही है। रामयश/ईएमएस 16 जून 2026