मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई और उसके आसपास के इलाकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद मुंबई और उसके जलापूर्ति क्षेत्र में अपेक्षित बारिश नहीं हुई है। इसके चलते शहर पर गंभीर जल संकट का खतरा मंडराने लगा है। बांधों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है और अब मुंबईकरों को 20 प्रतिशत तक पानी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले सात प्रमुख बांधों में औसतन केवल 10 प्रतिशत जलसंचय शेष रह गया है। सामान्य परिस्थितियों में उपलब्ध जलसाठा 15 जून तक शहर की जरूरतें पूरी कर सकता है, लेकिन इस वर्ष वह तारीख भी निकल चुकी है और अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। ऐसे में जलसंकट की चिंता और बढ़ गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुंबई महानगरपालिका प्रशासन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि राज्य सरकार से अतिरिक्त आरक्षित जलसाठा मांगा जाए या फिर शहर में पानी की कटौती लागू की जाए। राज्य सरकार ने प्रशासन को 31 अगस्त तक के लिए जल प्रबंधन की योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आगामी महीनों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। - क्या होगा समाधान? स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि मुंबई के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गारगाई बांध परियोजना और डिसैलिनेशन (समुद्री जल को मीठा बनाने) परियोजना को मंजूरी दी गई है। हालांकि वर्तमान संकट का मुख्य कारण बारिश की कमी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पुराने कुओं और जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही नागरिकों से पानी बचाने और अच्छी बारिश की प्रार्थना करने की अपील की गई है। - आरक्षित पानी मिलेगा या होगी कटौती? जानकारों का मानना है कि फिलहाल राज्य सरकार से आरक्षित जल संग्रह प्राप्त करना ही सबसे व्यावहारिक विकल्प दिखाई देता है। यदि अतिरिक्त पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो मुंबई महानगरपालिका को वर्तमान 10 प्रतिशत कटौती को बढ़ाकर 20 से 25 प्रतिशत तक करना पड़ सकता है। इससे पहले वर्ष 2009 और 2014 में भी मुंबई में इसी तरह की जल कटौती लागू की गई थी। - वैकल्पिक जल स्रोतों पर जोर जल संकट की स्थिति में प्रशासन कुछ वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रहा है- निर्माण कार्यों के लिए बोरवेल और कुओं का उपयोग। उद्यानों और गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए टैंकर जल का इस्तेमाल। पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विशेष जल वितरण योजना। पानी की बर्बादी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाना। सात धरणों से बुझती है मुंबई की प्यास - मुंबई की सालभर की जल आवश्यकताएं सात प्रमुख धरणों से पूरी की जाती हैं- अप्पर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी। ये बांधे मुख्य रूप से ठाणे, पालघर और नाशिक जिलों में स्थित हैं। मुंबई से लगभग 100 से 150 किलोमीटर दूर स्थित इन जलाशयों से शहर को प्रतिदिन लगभग 3,850 मिलियन लीटर तथा वर्षभर में करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर पानी उपलब्ध कराया जाता है। - मुंबईकरों की बढ़ी चिंता बारिश में हो रही देरी और तेजी से घटते जल संग्रह ने मुंबईकरों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें महानगरपालिका और राज्य सरकार के फैसलों पर टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो शहर को पानी की सख्त कटौती और जल प्रबंधन के कड़े उपायों का सामना करना पड़ सकता है। स्वेता/संतोष झा- १६ जून/२०२६/ईएमएस