क्षेत्रीय
16-Jun-2026
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दतिया (ईएमएस)| मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित जनसुनवाई में ग्राम फूलरा, जनपद पंचायत दतिया निवासी श्री अनिल झा, पुत्र श्री रामस्वरूप, जो अस्थि बाधित दिव्यांग हैं, ने अपने आवागमन में आने वाली कठिनाइयों से प्रशासन को अवगत कराया। जनसुनवाई में प्राप्त आवेदन पर त्वरित संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्यवाही करते हुए जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप श्री अनिल झा को बैटरी चलित मोटर ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई। ट्राइसाइकिल प्राप्त होने से उनके दैनिक आवागमन, सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता एवं रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हो सकेगी। साथ ही वे अधिक आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकेंगे तथा दूसरों पर निर्भरता भी कम होगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा दिव्यांगजनों को समान अवसर, सम्मानजनक जीवन एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करने के उद्देश्य से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 लागू किया गया है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला प्रशासन दतिया द्वारा विशेष अभियान एवं जनहितकारी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जिले को एक दिव्यांगजन हितैषी एवं सुगम जिला के रूप में विकसित किया जा सके। कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेड़े ने कहा है कि दिव्यांगजनों को शासन की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए सभी विभागों को संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन तक आवश्यक सहायता एवं सुविधाएं समय पर पहुंचाई जाएं। बैटरी चलित मोटर ट्राइसाइकिल प्राप्त करने के बाद श्री अनिल झा का चेहरा खुशी से खिल उठा। उन्होंने कहा कि यह सहायता उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और नई ऊर्जा लेकर आई है। अब उन्हें आवागमन में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा वे अपने कार्य स्वयं कर सकेंगे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण सहयोग के लिए माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े एवं जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया। जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजनों के लिए सुगम, सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल दिव्यांगजनों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।