राष्ट्रीय
16-Jun-2026


मुंबई,(ईएमएस)। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय युवाओं को पारंपरिक करियर विकल्पों पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है, वे कहते हैं कि केवल डिग्रियां अब नौकरी की गारंटी नहीं हैं। नागेश्वरन ने साफ कहा कि एमबीए जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों का दौर अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने युवाओं को आगाह किया कि वैश्वीकरण ने एक समय सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और एमबीए जैसी पढ़ाई को बढ़ावा दिया था, लेकिन अब वह दौर निकल चुका है। भविष्य उन व्यापारिक कौशलों (ट्रेड स्किल्स), सॉफ्ट स्किल्स और मानवीय समझ व उपस्थिति पर आधारित पेशों का है, जिन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आसानी से नहीं बदल सकती। नागेश्वरन ने बताया कि भारत में ऐतिहासिक रूप से वेल्डिंग, प्लंबिंग, बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रिकल वर्क जैसे कारोबारी पेशों को कमतर आंका गया है, जबकि स्विट्जरलैंड, जर्मनी और जापान जैसे देशों में इनका अत्यधिक सम्मान होता है। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने एक युवा शेफ का उदाहरण दिया, जो कि सोशल मीडिया पर दूसरों के करियर देखकर हीन महसूस हो रहा था। नागेश्वरन ने सलाह दी कि खाना पकाने का हुनर ऐसा है जिसे एआई आसानी से नहीं बदल सकता। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग, देखभाल और आतिथ्य सत्कार जैसे मानवीय कौशल वाले करियर आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होने वाले है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने रोजगार क्षमता को देश के स्वास्थ्य से भी जोड़ा। उन्होंने चिंता जाहिर की कि भारत समृद्ध होने से पहले ही अस्वस्थ होता जा रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों का हवाला देकर उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के बावजूद, हर आय वर्ग में मोटापा तेजी से बढ़ा है, जिसका कारण सुस्त जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि की कमी है। नागेश्वरन के अनुसार, आर्थिक विकास के लिए नागरिकों का स्वस्थ और कार्यकुशल होना उतना ही जरूरी है जितना कि टेक्नोलॉजी या इंफ्रास्ट्रक्चर है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे उन कौशलों को सीखने पर ध्यान केंद्रित करें जिन्हें तकनीक आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकती, और अपनी व्यावसायिक डिग्रियों की तरह ही अपनी सेहत में भी निवेश करें। आशीष दुबे / 16 जून 2026