खेल
03-Aug-2025
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मुम्बई (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) उम्र-धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए अब कड़े कदम उठाने जा रही है। इसी के तहत ही खिलाड़ियों की योग्यताओं के सत्यापन के लिए एक बाहरी एजेंसी नियुक्त की जाएगी। बोर्ड के अनुसार आयु-धोखाधड़ी और खिलाड़ियों की योग्यताओं की जांच के लिए एक बाहरी एजेंसी नियुक्ति की जा रही है। हाल ही में सत्यापन सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं से बोलियां भी मांगी गयी थीं। इस माह के अंत तक नई एजेंसी नियुक्त किये जाने की उम्मीद है। खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज या प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए जाने के मामले को बीसीसीआई ने गंभीरता से लिया है। बोर्ड का उद्देश्य किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की संभावना को समाप्त करना है। बोर्ड अभी दो-स्तरीय आयु-सत्यापन प्रणाली अपनाता है। पहले में दस्तावेजों और जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शामिल है जबकि दूसरा अस्थि परीक्षण है, जिसे आमतौर पर टीडब्ल्यू3 (टैनर-व्हाइटहाउस 3) पद्धति के रूप में जाना जाता है। ये सत्यापन आमतौर पर लड़कों के लिए अंडर-16 स्तर पर और लड़कियों के लिए अंडर-15 स्तर पर किए जाते हैं। बोर्ड ने बोली लगाने वाली संस्थाओं से अपेक्षित आवश्यकताओं की रूपरेखा बनायी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बोली लगाने वाली एजेंसियों के पास प्रतिष्ठित फर्मों को पृष्ठभूमि सत्यापन सेवाएं प्रदान करने का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इनमें कॉर्पोरेट कंपनियां शैक्षणिक बोर्ड/संस्थान और भर्ती निकाय शामिल हैं पर यह इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। इसके अलावा एजेंसी के पास एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क या सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भौतिक और डिजिटल दोनों तरह से सत्यापन करने की क्षमता होनी चाहिए। बोर्ड आम तौर पर जुलाई और अगस्त में उम्र का सत्यापन करता है। इस वर्ष यह प्रक्रिया सितंबर तक भी बढ़ सकती है क्योंकि एजेंसी के इस महीने के अंत तक काम शुरू करने की उम्मीद है। ईएमएस 03 अगस्त 2025