नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति के दोहरे मापदंड को उजागर करता है। ट्रंप जिस बात की दुहाई देकर भारत पर टैरिफ का सितम ढा रहे हैं, उसी मापदंड पर वह पश्चिमी देशों के लिए आंखें मूंदे खड़े हैं। फिनलैंड स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन ईजी एंड क्लीन एयर ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप की दोहरी मानसिकता को उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन-रूस जंग शुरू होने के बाद से जीवाश्म ईंधन के निर्यात से रूस को हुए राजस्व में भारत की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी ही है, जबकि यूरोपीय यूनियन की राजस्व हिस्सेदारी 23 फीसदी है, जो भारत से करीब दोगुनी है। इसके अलावा जी-7 देशों के टैंकर आधे से अधिक बैरल का आयात कर रहे हैं। बावजूद इसके ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी और यूरोपीय यूनियन पर उसका एक तिहाई से भी कम यानी सिर्फ 15 फीसदी का टैरिफ लगाया है। इन परिस्थितियों में भारत पर टैरिफ दोगुना किए जाने पर नई दिल्ली ने सधी प्रतिक्रिया देते हुए उसे अनुचित और अविवेकपूर्ण करार दिया है। भारत ने अमेरिका पर चुनिंदा देशों पर टैरिफ लगाने और निशाना साधने का आरोप लगाया है। नई दिल्ली के बयान में कहा गया है, हाल के दिनों में अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात को निशाना बनाया है। हमने इन मुद्दों पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है कि हमारे आयात बाजार कारकों पर आधारित हैं और भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के समग्र उद्देश्य से किए जाते हैं। इसलिए यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर उन कार्यों के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का विकल्प चुना है, जो कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में कर रहे हैं। भारत से रूस ने कमाए 12,100 करोड़ रुपये रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने अब तक तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला, परिष्कृत ईंधन जैसे जीवाश्म ईंधन निर्यात से 923 अरब यूरो (92,300 करोड़ रुपये) कमाए हैं। इनमें 212 अरब यूरो (21,200 करोड़) यूरोपीय यूनियन के देशों से आए हैं, जबकि भारत से मात्र 121 अरब यूरो (12,100 करोड़) आए, जो करीब आधा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन 200 अरब यूरो (20,000 करोड़) से अधिक की रूसी ऊर्जा खरीद के साथ रूसी ईंधन खरीदने वाले देशों में नंबर वन पर है। बावजूद ट्रंप ने चीन पर अभी 30 फीसदी टैरिफ ही है। वीरेंद्र/ईएमएस 08 अगस्त 2025