नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में गोमूत्र के औषधीय उपयोग पर बहस और शोध लंबे समय से चलते रहे हैं, लेकिन चीन के एक चिड़ियाघर ने इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कथित तौर पर ‘टाइगर यूरिन’ यानी बाघ का मूत्र बाजार में बेचने की शुरुआत कर दी है। यह मामला चीन के याआन प्रांत का बताया जा रहा है, जहां एक चिड़ियाघर ने 250 मि.ली. टाइगर यूरिन की शीशी 50 युआन यानी भारतीय मुद्रा में करीब 600 रुपये में बिक्री के लिए रखी है। इस पर उपयोग की विधि भी स्पष्ट रूप से लिखी गई है। चिड़ियाघर का दावा है कि टाइगर यूरिन में पारंपरिक चीनी चिकित्सा के अनुसार विशेष औषधीय गुण होते हैं। बताया जा रहा है कि लेबल में लिखा गया है कि इसे सफेद वाइन में मिलाकर अदरक के टुकड़े की मदद से शरीर के दर्द वाले हिस्सों पर लगाना चाहिए। यह गठिया, मोच और मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है। कुछ मामलों में इसे पीने की भी सलाह दी जाती है, हालांकि एलर्जी या रिएक्शन होने पर तुरंत बंद करने की चेतावनी भी दी गई है। सांस्कृतिक और पारंपरिक आधार बताया जा रहा है कि चिड़ियाघर का यह कदम पारंपरिक चाइनीज मेडिसन (टीसीएम) की मान्यताओं से जुड़ा है। बाघ को ताकत और बहादुरी का प्रतीक माना जाता है। कुछ पारंपरिक चीनी चिकित्सा ग्रंथों में बाघ के शरीर के विभिन्न अंगों और उत्पादों को औषधीय रूप में उपयोग किए जाने का उल्लेख भी मिलता है। आलोचना और चिंता हालांकि इस प्रयोग पर प्राकृतिक संरक्षण समूहों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है, कि यह वन्यजीवों के अंगों और उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा दे सकता है। बाघ जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों का इस तरह शोषण अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य है। इससे गलत चिकित्सा धारणाओं और अंधविश्वासों को बल मिल सकता है। यह गोमूत्र बनाम टाइगर यूरिन तो नहीं इसे लेकर कुछ लोगों का कहना है कि इस प्रकार से टाइगर यूनिन का बेचा जाना ऐसा तो नहीं भारत में गोमूत्र बेचे जाने का जवाब हो। गोमूत्र को लेकर दावा किया जाता है कि भारत में गोमूत्र (गाय का मूत्र) का उपयोग आयुर्वेद और पंचगव्य चिकित्सा में कई दशकों से होता आ रहा है और इस पर वैज्ञानिक शोध भी हुए हैं। जबकि दूसरी तरफ चीन के बाघ जैसे संरक्षित और हिंसक वन्यजीव का मूत्र बेचना, और उसे मानव चिकित्सा में प्रयोग करने की सलाह देना, न केवल नैतिक और वैज्ञानिक रूप से विवादास्पद है, बल्कि यदि इसका चलन बढ़ गया तो वन्य जीव संरक्षण कानूनों के भी खिलाफ जा सकता है। हिदायत/ईएमएस 09 अगस्त 2025