राज्य
30-Aug-2025
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- 8 महीनों में 40 बाघ-बाघिन और शावकों की मौत भोपाल (ईएमएस)। देश में टाइगर स्टेट का दर्जा रखने वाले मप्र से चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। साल 2025 में अभी तक सिर्फ आठ महीनों में ही 40 बाघ और शावकों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा देशभर में सबसे ज्यादा है। मप्र के बाद महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि मरे हुए बाघों में 5 से 8 साल की उम्र की 9 बाघिनें भी शामिल हैं, जो आने वाले समय में बाघों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती थीं। विशेषज्ञों के मुताबिक मौतों की बड़ी वजह सरकारी लापरवाही और निगरानी तंत्र की नाकामी है, जबकि कुछ मामलों में आपसी संघर्ष भी सामने आए हैं। हाल ही में बाघों की लगातार मौत के बाद प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े ने अधिकारियों की कड़ी खिंचाई की। उन्होंने सार्वजनिक पत्र जारी कर माना कि रिजर्व और जंगलों में बाघों की मौतें हो रही हैं और विभाग को इसका पता तक नहीं चल पा रहा है, जो सबसे बड़ी चूक है। अंबाड़े ने चेतावनी दी है कि आगे यदि मौतें प्राकृतिक कारणों के अलावा अन्य वजहों से हुईं तो संबंधित अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। अफसरों की गैर-जिम्मेदारी आई सामने मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद वन बल प्रमुख ने पहली बार खुले तौर पर अफसरों की निंदा की है। बताया गया कि पहले कुछ अफसर विभागीय ग्रुप्स पर बाघों की मौत का मजाक उड़ाते थे। एक आईएफएस अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया था कि बूढ़े बाघों की मौत तय है। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े ने कहा कि अभी अधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी किया गया है। आगे यदि मौतें रुकती नहीं हैं तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रिजर्व और सामान्य वन क्षेत्रों में पाई जा रही कमियों को दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 5 साल का रिकॉर्ड 2025 - 40 मौतें (अगस्त तक) 2024 - 50 मौतें 2023 - 43 मौतें 2022 - 34 मौतें 2021 - 41 मौतें विनोद / 30 अगस्त 25