8 किमी कटघोरा बायपास पर 2 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी आवाजाही * 39.02 में से 1.80 किलोमीटर फोरलेन सड़क नहीं बनी कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिले के कटघोरा-पतरापाली राजमार्ग अंतर्गत ग्राम जुराली के पास 1.80 किलोमीटर फोरलेन सड़क 2 साल बाद भी मुआवजा न मिलने की वजह से नहीं बन सकी है। किसान इस बार भी धान की फसल ले रहे हैं। 111 में से 64 किसानों को नई दर से मुआवजा वितरण भी चल रहा है। फोरलेन सड़क नहीं बनने से 8 किलोमीटर की सड़क पर आवाजाही बंद है। अब धान कटाई के बाद ही सड़क निर्माण संभव है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कटघोरा से पतरापाली सड़क की लंबाई 39.02 किलोमीटर है। इसकी लागत 850 करोड़ रुपए है। सड़क का निर्माण 2 साल पहले ही हो चुका है, लेकिन ग्राम जुराली के पास 1.80 किलोमीटर सड़क मुआवजा की वजह से रुका है। दोनों छोर पर सड़क बन चुकी है। बीच का हिस्सा बाकी है। बीच का हिस्सा बाकी है। कटघोरा बायपास की सड़क के नहीं बनने से आवाजाही बंद है। लोगों को अभी पीडब्ल्यूडी के बायपास या कटघोरा नगर से होकर आवाजाही करनी पड़ती है। ग्राम जुराली के 111 किसानों ने कम दर पर मुआवजा बनाने के कारण लेने से ही इंकार कर दिया था। ग्राम जुराली कटघोरा नगर पालिका का ही वार्ड है। किसानों ने मुआवजा निर्धारण को आर्बिट्रेटर कमिश्नर बिलासपुर संभाग के न्यायालय में चुनौती दी थी। किसानों का कहना था कि नगरपालिका क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट से कम जमीन होने पर हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा निर्धारण किया है। आर्बिट्रेटर ने सुनवाई के बाद में 63 किसानों को नई दर से मुआवजा देने का आदेश भी अप्रैल में जारी कर दिया था, लेकिन किसानों को मुआवजा का वितरण काफी देर में शुरू हुआ। इस वजह से किसान जमीन पर धान की फसल ले रहे हैं। कटघोरा बायपास के बनने से लोग नगर में घुसे बिना ही अंबिकापुर राजमार्ग की ओर आवाजाही कर सकेंगे। हनुमानगढ़ी के पास इसकी एंट्री पॉइंट है। * मुआवजा मिल जाए तो छोड़ देंगे जमीन प्रभावित किसान शत्रुघ्न पटेल, इरशाद हसन आदि सहित अन्य का कहना है कि मुआवजा मिलने पर जमीन खाली कर देंगे। सड़क बनने से हमें कोई परेशानी नहीं है। मुआवजा मिलने में देरी हुई है। तब तक हम लोग खेत में धान लगा चुके थे। कई लोगों को अभी भी मुआवजा नहीं मिला है। * 8.5 हेक्टेयर जमीन की जा रही अधिग्रहित ग्राम जुराली में फोरलेन सड़क बनाने 111 किसानों की 8.5994 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन तत्कालीन अधिकारियो ने सड़क के बजाय कृषि कार्य के लिए अधिग्रहित बता दिया था। इसके हिसाब से ही मुआवजा निर्धारण कर दिया गया। * जमीन खाली करने दो बार हो चुका प्रयास प्रशासन दिसंबर 2024 में जुराली की जमीन को खाली कराने दो बार प्रयास भी कर चुका है। जमीन समतलीकरण के लिए मशीन भी लगाई थी, लेकिन इसका किसानों ने जमकर विरोध किया था। इसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा था। * बटांकन होने से 56 का मुआवजा फंसा ग्राम जुराली में भी जमीन अधिग्रहण में घोटाले की तैयारी थी। इसी वजह से 111 में से 56 लोगों का मुआवजा नहीं बना है। इन लोगों ने अधिक मुआवजा के लिए ही जमीन का बटांकन कर लिया था। कई लोग तो इस मामले को लेकर न्यायालय भी चले गए हैं। * जमीन क्लियर होने पर रोड होगा सड़क निर्माण कार्य एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डी.डी. पार्लावार का कहना है की जमीन मिलने के बाद भी सड़क निर्माण किया जाएगा । जहां भी जमीन क्लियर हो रही है, वहां सड़क बना रहे हैं। 31 अगस्त / मित्तल