(1 जवनरी वैश्विक परिवार दिवस ) नववर्ष का पहला दिन केवल कैलेंडर बदलने का संकेत नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन, नई शुरुआत और बेहतर भविष्य के संकल्प का अवसर भी होता है। इसी भावभूमि पर हर साल 1 जनवरी को मनाया जाने वाला वैश्विक परिवार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि दुनिया की तमाम सीमाओं, मतभेदों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद मानवता का मूल स्वर एक ही है। यह दिन हमें यह देखने के लिए प्रेरित करता है कि राष्ट्रों के बीच खींची गई रेखाओं से परे भी एक साझा रिश्ता है, जो हमें एक बड़े वैश्विक परिवार के रूप में जोड़ता है। वर्ष 1993 से शुरू हुई यह परंपरा संयुक्त राष्ट्र के शांति में एक दिन की अवधारणा से विकसित हुई और इसका मूल उद्देश्य युद्ध, हिंसा और टकराव के बजाय संवाद, समझ और सहयोग को बढ़ावा देना है। वैश्विक परिवार दिवस का विचार जितना सरल है, उतना ही गहरा भी है। परिवार समाज की मूलभूत इकाई है, जहां से व्यक्ति के संस्कार, मूल्य और दृष्टि का निर्माण होता है। जिस तरह एक मजबूत परिवार एक सशक्त व्यक्ति को गढ़ता है, उसी तरह सशक्त व्यक्ति मिलकर एक स्वस्थ समाज और शांत विश्व की नींव रखते हैं। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि यदि हम अपने घरों में संवाद, सहानुभूति और सम्मान की संस्कृति विकसित कर लें, तो वही संस्कृति धीरे-धीरे समाज और फिर पूरी दुनिया में फैल सकती है। समाज को वैश्विक परिवार दिवस से सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह विभाजन की मानसिकता को चुनौती देता है। आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक ने दुनिया को छोटा कर दिया है, लेकिन दिलों के बीच की दूरी कई बार बढ़ती हुई नजर आती है। जाति, धर्म, भाषा, रंग और विचारधारा के नाम पर खड़ी दीवारें समाज को भीतर से कमजोर करती हैं। वैश्विक परिवार दिवस इन दीवारों को गिराने का प्रतीक बनता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि यदि हम एक-दूसरे को परिवार के सदस्य की तरह देखें, तो घृणा, हिंसा और असहिष्णुता के लिए स्थान स्वतः कम हो जाएगा। जब समाज में अपनत्व की भावना मजबूत होती है, तो अपराध, तनाव और सामाजिक विघटन जैसी समस्याएं भी घटने लगती हैं। परिवार के स्तर पर इस दिवस का महत्व और भी गहरा है। आधुनिक जीवनशैली में परिवार अक्सर समय, संवाद और भावनात्मक जुड़ाव की कमी से जूझ रहा है। व्यस्त दिनचर्या, डिजिटल दुनिया में उलझाव और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की दौड़ ने कई परिवारों को केवल साथ रहने वाला समूह बना दिया है, जहां मन से जुड़ाव कमजोर पड़ता जा रहा है। वैश्विक परिवार दिवस एक अवसर देता है कि हम अपने घरों में रुककर देखें, सुनें और महसूस करें। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि परिवार केवल आर्थिक सुरक्षा या सामाजिक पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि भावनात्मक संबल, विश्वास और बिना शर्त स्वीकार्यता का स्थान है। जब परिवार मजबूत होता है, तो व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक संतुलित, आत्मविश्वासी और सहानुभूतिशील बनता है। इस संदर्भ में उन लोगों की जिंदगी पर भी विचार करना आवश्यक है जिनके पास पारंपरिक अर्थों में परिवार नहीं है। अनाथ बच्चे, वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्ग, युद्ध या आपदाओं में अपने परिजन खो चुके लोग, या फिर महानगरों में अकेलेपन से जूझते युवा, इन सभी के जीवन में परिवार की कमी एक गहरे भावनात्मक शून्य के रूप में मौजूद रहती है। परिवार केवल रक्त संबंधों का नाम नहीं, बल्कि वह सुरक्षित भावनात्मक दायरा है जहां व्यक्ति खुद को स्वीकार्य और सुरक्षित महसूस करता है। जिनके जीवन में यह दायरा नहीं होता, वे अक्सर असुरक्षा, अकेलेपन और उपेक्षा की भावना से जूझते हैं। वैश्विक परिवार दिवस ऐसे लोगों के लिए भी एक संदेश लेकर आता है कि परिवार की अवधारणा को विस्तृत किया जाए, जहां समाज, पड़ोस, मित्र और संस्थाएं मिलकर उस खालीपन को भरने का प्रयास करें। यह दिन हमें सिखाता है कि किसी के जीवन में परिवार बनने के लिए केवल रिश्ते नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी की भावना चाहिए। भावनात्मक दृष्टि से वैश्विक परिवार दिवस अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें उन सरल लेकिन गहरे क्षणों की याद दिलाता है जो जीवन को अर्थ देते हैं। मां की ममता, पिता का भरोसा, दादा-दादी की कहानियां, भाई-बहन की नोकझोंक और मित्रों का साथ, ये सब मिलकर व्यक्ति के भीतर एक ऐसा भावनात्मक आधार बनाते हैं, जो कठिन समय में उसे संभालता है। जब हम पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की बात करते हैं, तो इसका अर्थ यही है कि हम दूसरों के दुख को अपना समझें, उनकी खुशी में सहभागी बनें और संकट के समय उनके साथ खड़े हों। यह भावनात्मक विस्तार ही वैश्विक परिवार दिवस की आत्मा है। आज के समय में परिवार का महत्व और भी बढ़ गया है। तेजी से बदलती सामाजिक संरचना, बढ़ता मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता के दौर में परिवार एक स्थिर आधार प्रदान करता है। मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते संकट के बीच परिवार का सहारा किसी औषधि से कम नहीं है। बच्चों के लिए परिवार पहला स्कूल होता है, जहां वे विश्वास, करुणा और जिम्मेदारी सीखते हैं। बुजुर्गों के लिए परिवार सम्मान और अपनत्व का स्थान है, जहां वे अपने अनुभव और ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। कार्यशील युवाओं के लिए परिवार वह स्थान है, जहां वे दुनिया की कठोरता से राहत पाते हैं। वैश्विक परिवार दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि यदि परिवार कमजोर होंगे, तो समाज और राष्ट्र भी कमजोर पड़ेंगे। यह दिवस समाज को यह संदेश भी देता है कि शांति केवल अंतरराष्ट्रीय समझौतों या राजनीतिक निर्णयों से नहीं आती, बल्कि उसकी शुरुआत घर से होती है। जब परिवारों में संवाद की संस्कृति होगी, मतभेदों को बातचीत से सुलझाने की आदत होगी और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास होगा, तो वही मूल्य समाज और फिर वैश्विक स्तर पर परिलक्षित होंगे। वैश्विक परिवार दिवस इसी निरंतरता की बात करता है, जहां परिवार से शुरू होकर शांति की धारा पूरी दुनिया तक पहुंचे। अखबार के पन्नों पर यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें केवल सूचना नहीं, बल्कि दिशा देता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। एक सभ्य और प्रगतिशील समाज वही है, जहां रिश्ते मजबूत हों, जहां कोई अकेला न हो और जहां मतभेदों के बावजूद संवाद की गुंजाइश बनी रहे। वैश्विक परिवार दिवस इस आदर्श की ओर संकेत करता है। वैश्विक परिवार दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक दृष्टि है। यह दृष्टि हमें सिखाती है कि यदि हम अपने छोटे-छोटे परिवारों में प्रेम, सम्मान और समझ की लौ जलाए रखें, तो वही लौ पूरी दुनिया को रोशन कर सकती है। यह दिन हमें यह विश्वास दिलाता है कि युद्ध और हिंसा अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि मानवता के पास संवाद और सहअस्तित्व का विकल्प हमेशा मौजूद है। नववर्ष के पहले दिन मनाया जाने वाला यह दिवस हमें यही संकल्प लेने को प्रेरित करता है कि हम न केवल अपने परिवारों के प्रति, बल्कि पूरी दुनिया के प्रति भी परिवार जैसा व्यवहार करें। तभी एक धरती, एक परिवार और एक शांत भविष्य का सपना साकार हो सकता है। ( L103 जलवंत टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट नियर नन्दालय हवेली सूरत मो 99749 40324 ,वरिष्ठ पत्रकार, साहित्य्कार,स्तम्भकार) ईएमएस / 31 दिसम्बर 25