ज़रा हटके
01-Jan-2026
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ताइपे,(ईएमएस)। साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए नए साल के जश्न के बजाय एक भीषण सैन्य टकराव की आशंका लेकर आया है। जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत की तैयारी कर रही थी, तब ताइवान की सरहद पर बारूद की गंध और लड़ाकू विमानों की गर्जना ने शांति को भंग कर दिया। बीजिंग से आए एक कड़े सैन्य आदेश के बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ताइवान द्वीप को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। ड्रैगन ने इस घेराबंदी में अपने सबसे घातक स्टील्थ फाइटर जेट्स, परमाणु बमवर्षक और विशाल युद्धपोतों को तैनात कर दिया है, जिसे विशेषज्ञ एक खौफनाक जंग की रिहर्सल मान रहे हैं। चीन ने पिछले 24 घंटों के भीतर ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में अपनी शक्ति का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के 130 से अधिक लड़ाकू विमानों ने ताइवान की हवाई सीमा को चुनौती दी। इस बेड़े में चीन के सबसे आधुनिक जे-20 स्टील्थ फाइटर और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बमवर्षक विमान शामिल थे। आसमान के साथ-साथ समंदर में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। चीन ने ताइवान की आर्थिक लाइफलाइन माने जाने वाले दो सबसे बड़े बंदरगाहों—कीलुंग और काओशुंग—की पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी है। चीनी कोस्ट गार्ड के विशाल जहाज ताइवान के गश्ती जहाजों के अत्यंत करीब पहुंच गए हैं, जिससे किसी भी समय सीधी भिड़ंत का खतरा पैदा हो गया है। चीन की इस आक्रामकता के जवाब में ताइवान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। जैसे ही चीनी विमानों ने सीमा लांघने की कोशिश की, ताइवान के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने सिंचू एयर बेस से हुंकार भरते हुए उड़ान भरी। ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने अपनी मिसाइल प्रणालियों को एक्टिव मोड पर डालते हुए चीन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि चीनी सेना ने उनकी 12 नॉटिकल मील की समुद्री सीमा को पार करने की जुर्रत की, तो इसका अंजाम टोटल वॉर (पूर्ण युद्ध) होगा। ताइवान के प्रमुख शहरों में नागरिक सुरक्षा अभ्यास शुरू कर दिए गए हैं, जहां लोग मेट्रो स्टेशनों और बंकरों में छिपने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत में चीन के इस गुस्से के पीछे ताइवान और अमेरिका के बीच हुई एक बड़ी सैन्य डील है। ताइवान ने हाल ही में अमेरिका के साथ 11.1 अरब डॉलर के अत्याधुनिक ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया है, जिसने बीजिंग को बुरी तरह उकसा दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भी चौंकाने वाला दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को 2027 तक ताइवान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने का गुप्त अल्टीमेटम दिया है और वर्तमान सैन्य अभ्यास उसी बड़े मिशन का हिस्सा हो सकता है। दूसरी ओर, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि ताइवान कभी भी चीन का हिस्सा नहीं बनेगा। बीजिंग की लाइव फायर ड्रिल और तोपखाने की तैनाती ने संकेत दिए हैं कि नया साल शुरू होते ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव का एक नया और खतरनाक अध्याय शुरू हो सकता है। पूरी दुनिया इस समय सांसें थामकर देख रही है कि क्या ड्रैगन का यह अभ्यास केवल एक शक्ति प्रदर्शन है या किसी बड़े सरप्राइज अटैक की भूमिका। वीरेंद्र/ईएमएस 01 जनवरी 2026