:: हताश हो चुके बुजुर्ग का दिल्ली तक समन्वय कर रिकवर किया आधार, कलेक्ट्रेट में छलके खुशी के आँसू :: इंदौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को इंदौर जिला प्रशासन ने धरातल पर चरितार्थ कर दिखाया है। कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सुलझा, जिसने न केवल एक बुजुर्ग की बरसों पुरानी हताशा दूर की, बल्कि तकनीकी जटिलताओं के बीच मानवीय संवेदनाओं की नई मिसाल पेश की। :: भटकते रहे दर-दर, हर बार मिली नाकामी :: 56 वर्षीय भेरुलाल पिछले पाँच वर्षों से एक अदद आधार कार्ड के लिए दर-दर भटक रहे थे। आधार के अभाव में वे शासन की तमाम जनहितैषी योजनाओं से वंचित थे। वर्ष 2020 से वे लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन तकनीकी कारणों से उनका आवेदन हर बार रिजेक्ट हो रहा था। गरीबी और व्यवस्था की मार से टूट चुके भेरुलाल जब अंतिम उम्मीद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुँचे, तो प्रशासन ने उनके प्रकरण को पूरी गंभीरता से लिया। :: दिल्ली तक पहुँचा मामला, ऐसे सुलझी गुत्थी :: जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक अतुल दुबे ने भेरुलाल की व्यथा सुनी और तत्काल यूआईडीएआई (UIDAI) नई दिल्ली से संपर्क साधा। गहन पड़ताल में पता चला कि भेरुलाल का आधार वर्षों पहले बन चुका था, लेकिन उनके पास न तो आधार नंबर था और न ही कोई रसीद। जिला प्रशासन ने हार नहीं मानी और तकनीकी टीम के साथ निरंतर समन्वय कर डेमोग्राफिक जानकारी के आधार पर पुराना डेटा रिकवर कर लिया। :: जब मुस्कान में बदली बरसों की बेबसी :: जैसे ही डिजिटल रिकवरी के बाद आधार कार्ड डाउनलोड कर भेरुलाल को सौंपा गया, उनकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। पाँच साल की लंबी प्रतीक्षा और बेबसी एक पल में मुस्कान में बदल गई। अब वे वृद्धावस्था पेंशन और राशन जैसी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। भेरुलाल ने कलेक्टर शिवम वर्मा और जिला प्रशासन का हृदय से आभार जताते हुए कहा कि आज उन्हें जीने का नया आधार मिल गया है। प्रकाश / 01 जनवरी 2026