वाशिंगटन (ईएमएस)। अफगानिस्तान में अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का क्रैश देश और दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गया है। यह हादसा वर्दक प्रांत के मैदान शहर के पास हुआ, जो राजधानी काबुल के पश्चिम में स्थित है और रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। ड्रोन का मलबा बर्फीली पहाड़ियों पर देखा गया, लेकिन जमीन पर किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ड्रोन तालिबान या किसी अन्य संगठन के हाथों मार गिराया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार यह एमक्यू-9 रीपर ड्रोन करीब 2000 किलोमीटर दूर कतर के अल उदेद एयर बेस से रिमोट ऑपरेट किया जा रहा था। कुछ अटकलें यह भी हैं कि ड्रोन को पाकिस्तान से ऑपरेट किया गया हो। अमेरिका ने 2021 में अफगानिस्तान से सैन्य वापसी की थी, लेकिन ओवर-द-होराइजन रणनीति के तहत ड्रोन निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों को जारी रखता रहा है। बताया जा रहा है कि यह हादसा एक नियमित मिशन के दौरान हुआ। शुरुआती रिपोर्ट्स में ड्रोन क्रैश का कारण तकनीकी खराबी या कंट्रोल लिंक टूटना बताया गया है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन सैटेलाइट के जरिए नियंत्रित होता है, इसलिए सिग्नल की देरी या खराब मौसम भी हादसे की वजह बन सकता है। फिलहाल किसी आतंकी संगठन या तालिबान ने ड्रोन गिराने का दावा नहीं किया है। यह मामला यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा अमेरिकी ड्रोन गिराने की घटनाओं से अलग है। ड्रोन क्रैश अमेरिका के लिए तकनीकी और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय है। मलबे में मौजूद उन्नत तकनीक दुश्मन के हाथ लगने का खतरा पैदा कर सकती है। आमतौर पर अमेरिका ड्रोन को आत्म-नष्ट करने या बाद में स्ट्राइक कर तकनीक नष्ट करने की कोशिश करता है, लेकिन अफगानिस्तान में इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद अमेरिका इस्लामिक स्टेट-खुरासान जैसे आतंकवादी समूहों पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन ऑपरेशन जारी किए हुए हैं। 2020 के दोहा समझौते में तालिबान ने अमेरिकी जमीन पर हमले न होने का वादा किया था, लेकिन अमेरिका को लगता है कि तालिबान इन समूहों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पा रहा। बात दें कि एमक्यू-9 रीपर अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और घातक ड्रोन है। इस ड्रोन को जनरल एटोमिक्स कंपनी ने बनाया है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 20 मीटर है और यह लगातार 27 घंटे तक उड़ान भर सकता है। ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई पर निगरानी कर सकता है और इसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, सेंसर और हेलफायर मिसाइल दागने की क्षमता है। एक एमक्यू-9 रीपर सिस्टम की कीमत 30 मिलियन डॉलर से अधिक होती है, जिसमें ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम भी शामिल है। इस घटना पर पेंटागन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। आम तौर पर जांच पूरी होने तक अमेरिका चुप्पी बनाए रखता है। अमेरिकी वायुसेना की जांच टीम उड़ान डेटा, सिस्टम प्रदर्शन और ऑपरेटर इनपुट का विश्लेषण करती है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके। आशीष दुबे / 2 जनवरी 2026