नई दिल्ली (ईएमएस)। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) के एक अहम फैसले से भारत के रिटायरमेंट बचत सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद की जा रही है। नए नियमों के तहत अब शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक अपने स्तर पर पेंशन फंड स्थापित कर सकेंगे। हालांकि, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के मौजूदा नियमों, ढांचे और निवेश सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पीएफआरडीए ने साफ किया है कि एनपीएस की संरचना पहले की तरह ही रहेगी। टैक्स लाभ, निवेश नियम, निकासी प्रक्रिया और नियामकीय निगरानी में कोई बदलाव नहीं होगा। यह फैसला केवल पेंशन फंड मैनेजमेंट में बैंकों की भागीदारी से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों की सीधी भागीदारी से निवेशकों को अधिक विकल्प मिलेंगे। कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के अनुसार, एनपीएस का प्रोडक्ट तुरंत नहीं बदलेगा, लेकिन निवेशकों का अनुभव जरूर बेहतर होगा। बैंकों का बड़ा नेटवर्क और मजबूत डिजिटल सिस्टम, खासकर गैर-मेट्रो और ग्रामीण क्षेत्रों में, एनपीएस तक पहुंच को आसान बनाएगा। निवेशकों का भरोसा अहम भूमिका निभाएगा। जिन बैंकों से लोगों का पहले से संबंध है, उन्हीं से जुड़े पेंशन फंड मैनेजर चुनने का विकल्प निवेशकों को मिलेगा। इससे नामांकन और योगदान प्रबंधन की प्रक्रिया सरल होगी। सतीश मोरे/03जनवरी ---