लंदन (ईएमएस)। करीब 9 महीनों तक अंटार्कटिका के ग्लेशियर में गुम रहा एक छोटा रोबोट जब वापस लौटा तो ऐसी जानकारी लेकर आया कि वैज्ञानिक भी दंग रह गए। वैज्ञानिकों ने इसे टॉटन ग्लेशियर के पास छोड़ा था। वहां की बर्फ पूरी तरह पिघले तो समुद्र का जलस्तर 3.5 मीटर तक बढ़ सकता है। लेकिन यह रोबोट जल्दी ही बहकर दूर चला गया। इस रोबोट को आर्गो फ्लोट कहते हैं, जो समुद्र में तापमान और नमक की मात्रा नापता है। वैज्ञानिक निराश हो गए, क्योंकि वे टॉटन की बर्फ पिघलने की वजह जानना चाहते थे। अब यह रोबोट डेनमन और शैकलटन आइस शेल्फ के नीचे से गुजरकर लौटा। रोबोट ने नौ महीने बर्फ के नीचे बिताए और बहुत जरूरी जानकारी इकट्ठा की। जानकारी के अनुसार, आर्गो फ्लोट एक ऑटोमेटिक रोबोट है जो समुद्र में घूमता है। यह दो किलोमीटर गहराई तक जाता है, ऊपर नीचे होता रहता है। हर दस दिन में सतह पर आकर डेटा सैटेलाइट से भेजता है। दुनिया भर में ऐसे हजारों फ्लोट काम करते हैं। इस रोबोट ने पहली बार पूर्वी अंटार्कटिका की आइस शेल्फ के नीचे हर पांच दिन में तापमान का डेटा लिया। अंटार्कटिका की आइस शेल्फ तैरती हुई बड़ी बर्फ की चादरें हैं। ये जमीन की बर्फ को समुद्र में जाने से रोकती हैं। अगर नीचे से गर्म पानी आए तो ये पिघल जाती हैं। पिघलने पर जमीन की बर्फ तेजी से समुद्र में गिरती है और जलस्तर बढ़ता है। डेनमन ग्लेशियर में इतनी बर्फ है कि पूरी पिघले तो जलस्तर 1.5 मीटर बढ़ जाए। शैकलटन आइस शेल्फ पूर्वी अंटार्कटिका की सबसे उत्तरी शेल्फ है। वैज्ञानिकों जानना चाहते थे कि गर्म पानी इनके नीचे पहुंच रहा है या नहीं। यह काम अब रोबोट ने कर दिया। रोबोट टॉटन से बहकर डेनमन के पास पहुंचा। वहां गर्म पानी बर्फ के नीचे जा रहा था, जो पिघलने का कारण बन सकता है। फिर रोबोट बर्फ के नीचे चला गया। वैज्ञानिकों को लगा कि अब यह कभी नहीं लौटेगा। लेकिन नौ महीने बाद यह डेनमन और शैकलटन के नीचे से निकलकर बाहर आ गया। इस दौरान इसने 300 किलोमीटर का सफर तय किया और करीब 200 बार डेटा लिया। बर्फ के नीचे होने से जीपीएस नहीं मिलता था, लेकिन रोबोट जब बर्फ से टकराता तो मोटाई नाप लेता। सैटेलाइट की पुरानी जानकारी से मिलाकर वैज्ञानिकों ने इसका रास्ता पता कर लिया। डेटा से पता चला कि शैकलटन आइस शेल्फ के नीचे अभी गर्म पानी नहीं पहुंच रहा। वहां पानी ठंडा है और बर्फ फिलहाल सुरक्षित है। लेकिन डेनमन के नीचे गर्म पानी जा रहा है, जो बर्फ पिघला रहा है। अगर गर्म पानी की मात्रा थोड़ी भी बढ़ी तो पिघलना तेज हो जाएगा और बर्फ तेजी से पिघलने लगेगी है। टॉटन और डेनमन दोनों ग्लेशियर मिलकर समुद्र स्तर को पांच मीटर तक बढ़ा सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 04 जनवरी 2026