ज़रा हटके
06-Jan-2026
...


विंडहोक (ईएमएस)। भारत आ रहा खजाने से लदा जहाज 5 सौ साल पहले नामीबिया के रेगिस्तान में दफन हो गया था, जो अब जाकर बरामद हुआ है। नामीबिया के रेगिस्तान में हीरों की खुदाई के दौरान मजदूरों को रेत के नीचे से अजीब-सी ठक-ठक की आवाज सुनाई देने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब खुदाई आगे बढ़ी तो धीरे-धीरे रेत के नीचे छिपा 500 साल पुराना एक ऐसा खजाना सामने आया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। यह खोज नामीबिया के ओरान्जेमुंड इलाके में हुई, जहां हीरा खनन कंपनी नामदेब की ओर से खुदाई का काम चल रहा था। मजदूर जब गहराई में पहुंचे तो उन्हें लकड़ी के अजीब ढांचे जैसे टुकड़े दिखाई दिए, जिनमें जगह-जगह तांबे के हिस्से भी जुड़े हुए थे। शुरुआती तौर पर कर्मचारियों को यह बेकार का मलबा लगा और कुछ टुकड़ों को किनारे कर दिया गया। लेकिन जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, वहां से हाथी दांत और चमकदार सिक्के मिलने लगे। तेज धूप में जब इन सिक्कों पर रोशनी पड़ी तो उनकी चमक ने सभी को हैरान कर दिया और तभी एहसास हुआ कि वे किसी साधारण चीज नहीं, बल्कि एक बड़े खजाने के करीब पहुंच चुके हैं। सूचना मिलते ही पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। पड़ताल में सामने आया कि यह अवशेष 16वीं सदी के एक पुर्तगाली जहाज के हैं, जिसका नाम ‘बॉम जीसस’ या ‘गुड जीसस’ बताया गया। यह जहाज वर्ष 1533 में पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन से भारत के लिए रवाना हुआ था। इसका उद्देश्य भारत से मसाले और रेशम लाना और बदले में सोना-चांदी व अन्य कीमती सामान पहुंचाना था। हालांकि, रास्ते में यह जहाज अचानक लापता हो गया और लंबे समय तक खोज के बाद यह मान लिया गया था कि शायद किसी भयानक तूफान में यह समुद्र में डूब गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जहाज समुद्र तट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ और समय के साथ समुद्र पीछे हटता गया, जिससे जहाज रेत में दबता चला गया। सदियों तक रेगिस्तान की रेत ने इसे सुरक्षित रूप से ढक कर रखा। खुदाई में मिले खजाने में किंग जॉन तृतीय के शासनकाल के 2000 से अधिक शुद्ध सोने के सिक्के, 105 से ज्यादा कीमती हाथी दांत, करीब 17 टन तांबे की ईंटें, बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के, मध्यकालीन तोपें, तलवारें और उस दौर के उन्नत नेविगेशन उपकरण शामिल हैं। सुदामा/ईएमएस 06 जनवरी 2026