नई दिल्ली (ईएमएस)। क्या आप जानते हैं, तालियां बजाने से भी शरीर में नई ऊर्जा का प्रवाह किया जा सकता है? आयुर्वेद में ताली बजाने को ‘कर वादन क्रिया’ कहा जाता है। हाथ और हथेलियों का संबंध शरीर के सभी अंगों से जुड़ा होता है और ये महत्वपूर्ण मर्म बिंदुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो कई शारीरिक समस्याओं और विकारों को कम करने में मदद करते हैं। सिर्फ 10 से 15 मिनट रोजाना ताली बजाने से शरीर में सक्रियता बढ़ती है और यह कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। आयुर्वेद में एक्यूप्रेशर की प्राचीन पद्धति का इस्तेमाल सदियों से होता आया है। इसके माध्यम से ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है, बशर्ते सही मर्म बिंदुओं का पता हो। ताली बजाने की क्रिया भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। इसे करने से दिल और रक्त धमनियों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। इससे रक्त संचार सुचारू रूप से होता है और हृदय रोगों तथा उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। तनाव कम करने में भी ताली बजाने की क्रिया बेहद असरदार है। यह कॉर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन को कम करती है और मस्तिष्क में डोपामाइन व सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाती है, जिससे मानसिक स्थिति शांत और खुश रहती है। यह नींद को बेहतर बनाने में भी मदद करता है और एंग्जायटी से राहत दिलाता है। दमा और अस्थमा के रोगियों के लिए ताली बजाना और भी लाभकारी है। यह फेफड़ों और मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर बनाता है, जिससे श्वसन तंत्र मजबूत होता है और फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा, पाचन तंत्र और इम्यूनिटी पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह न केवल शारीरिक रोगों को कम करती हैं, बल्कि मन को प्रसन्न और शरीर को सक्रिय बनाती हैं। रोजाना 10-15 मिनट की यह आसान आदत आपकी जीवनशैली में बड़ा फर्क ला सकती है और स्वास्थ्य को मजबूती प्रदान कर सकती है। ताली बजाने से आंत और जिगर की क्रियाशीलता बढ़ती है, पेट की पाचन अग्नि मजबूत होती है और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार ताली बजाने जैसी साधारण क्रियाएं शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाकर स्वास्थ्य और मानसिक तंदरुस्ती दोनों सुनिश्चित करती हैं। सुदामा/ईएमएस 07 जनवरी 2026