नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपनी जिंदगी में कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से लड़कर भी खेल में वापसी की थी। भारत को 2011 विश्वकप में जीत दिलाने वाले युवराज ने इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर केविन पीटरसन से बातचीत के दौरान उन पलों के बारे में बताया है जब उन्हें डॉक्टर ने कैंसर होने की बात बतायी थी। तब उनसे कहा था कि आपके पास तीन से छह महीने का ही समय बचा है पर फिर भी युवराज विचलिल नहीं हुए और उन्होंने जीने का जुनून बनाये रखा। पीटरसन से बातचीत में युवराज ने कैंसर के खिलाफ मुकाबले को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें डर लग रहा था कि वह शायद नहीं बच पाएंगे। डॉक्टरों ने उनसे कह दिया कि उनके पास जीने के लिए सिर्फ 3 से 6 महीने हैं। अब आपको फैसला करना है कि इस समय में आप क्रिकेट खेलना चाहेंगे या इलाज कराना। युवराज ने कहा, तब मैं ऑस्ट्रेलिया टूर पर जाना चाहता था क्योंकि मैंने टेस्ट क्रिकेट में जगह पाना अभी शुरू ही किया था। मैं रिटायर होना नहीं चाहता था और मैं टेस्ट में जगह मिलने का 7 साल से इंतजार कर रहा था। आपको पता है कि मैं 40 टेस्ट मैचों में 12वां खिलाड़ी रहा हूं। मैं ऑस्ट्रेलिया टूर पर जा रहा था और फीजियो मेरे पास आए और कहा कि आप नहीं जा रहे हो। इसका कारण है कि मैंने डॉक्टर से बात की। उन्होंने कहा कि आपके पास जीने के लिए सिर्फ 3 से 6 महीने हैं। अब आप फैसला करो कि आप क्रिकेट खेलना चाहते हो या इलाज कराना। युवराज ने कहा, ‘ट्यूमर मेरे फेफड़े और दिल के बीच में था और वह दिल की नसों को दबा रहा था। इसलिए डॉक्टरों ने कहा कि अगर आप कीमोथेरेपी नहीं कराते हैं तब आपको हार्ट अटैक आ सकता है। और उसके बाद उन्होंने मुझे इलाज के लिए भेज दिया।’ युवराज ने कहा कि जब वह कैंसर का इलाज कराने गए तब एक डॉक्टर की कही एक बात ने उनमें हिम्मत, भरोसा और उम्मीद जगायी। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने कहा था आप एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बाहर निकलेंगे जैसे उसे कभी कैंसर हुआ ही न हो। डॉक्टर की तरफ से हौसला देने वाले वो पहले शब्द थे।’उसके बाद वह ठीक होते चले गये। युवराज ने अपने जज्बे और डॉक्टरों के इलाज की सहायता से कैंसर को हरा दिया। इस प्रकार देखा तो उन्होंने एक बार फिर अपने को जिंदगी में सच्चा चैंपियन साबित किया। ईएमएस 06जनवरी 2026