क्षेत्रीय
06-Jan-2026
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मंडला (ईएमएस)। मंडला के पटवारी संदीप कुशवाहा ने 18 दिसंबर को जिले के पटवारियों के ग्रुप में अपनी कुछ बात लिखकर भेजा था। उस समय कुशवाह निलंबित थे। जब इस मैसेज को बाकी पटवारी साथियों ने देखा तो उन्होंने आशंका जताई कि कुशवाहा तीन महीने से निलंबित है इसलिए उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है। इसके लिए उन्होंने कलेक्टर सोमेश मिश्रा समेत प्रशासन के कई अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। पटवारी संघ के दबाव के आगे संदीप कुशवाहा का कलेक्टर ने निलंबन तो खत्म कर दिया, मगर जिला प्रशासन का कहना है कि कुशवाहा को प्रशासनिक लापरवाही के चलते निलंबित किया गया था। पटवारी संघ इस मामले में राजनीति कर रहा है। पटवारी कमरे में बंद मिला, इलाज के लिए गया नागपुर इस मैसेज के बाद साथी पटवारी, अनहोनी की आशंका से घबराकर, तुरंत संदीप के लालीपुर स्थित घर की ओर भागे। वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था। परिवार ने बताया कि संदीप ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया है और किसी से बात नहीं कर रहा। बड़ी मुश्किलों के बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तो उसकी हालत बेहद खराब थी। वह डरा हुआ था, सहमा हुआ था और ऐसी बातें कर रहा था जिनका कोई सिर-पैर नहीं था। उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए, संघ के लोग उसे तुरंत इलाज के लिए नागपुर ले गए। पटवारी संघ का आरोप- मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी संदीप के मानसिक संतुलन खोने की खबर जिले में फैली, तो पटवारियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बीच, मामले को शांत करने की कोशिश में प्रशासन ने आनन-फानन में संदीप कुशवाहा का निलंबन वापस लेते हुए उसे बहाल कर दिया। जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र बैरागी ने इस मामले में सीधे तौर पर तत्कालीन कलेक्टर सोमेश मिश्रा और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, पटवारी संदीप कुशवाहा को कलेक्टर और अधिकारी मिलकर कई महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। पहले तो वह चुपचाप सब कुछ सहता रहा, लेकिन जब दबाव बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो वह टूट गया।