क्षेत्रीय
07-Jan-2026
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राजनंदगांव (ईएमएस)। पंचम मूल जगद्गुरु भक्तियोग रसावतार 1008 स्वामी श्री कृपालु जी महाराज की कृपा पात्र प्रचारिका सुश्री श्रीश्वरी देवी जी का दिव्य दार्शनिक प्रवचन के तीसरे दिवस में सुश्री श्रीश्वरी देवी जी ने बताया कि ईश्वर को जानकर ही कोई जीव माया से पार हो सकता है, इसका अन्य कोई मार्ग नहीं है किंतु हम ईश्वर को कैसे जाने? इसके उत्तर में दीदीजी ने वेदों–शास्त्रों से ढेरों प्रमाण देते हुए यह बताया कि ईश्वर को कोई जान ही नहीं सकता, क्योंकि ईश्वर इंद्रिय, मन एवं बुद्धि से परे है । हमारी इंद्रिय, मन एवं बुद्धि प्राकृत है, एवं भगवान दिव्य है अतः प्राकृत इंद्रिय, मन एवं बुद्धि दिव्य भगवान को भला कैसे ग्रहण कर सकती है। साथ ही साथ भगवान इंद्रिय, मन एवं बुद्धि के प्रेरक है, प्रकाशक है, धारक है, ज्ञाता है, एवं सर्वज्ञ है और हम जीव अल्पज्ञ है, इसलिए भगवान को नहीं जाना जा सकता। पुनः वेद–शास्त्रों से प्रमाण देते हुए उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि भगवान को एक गधा भी जान सकता है लेकिन कैसे? जिस पर कृपा हो जाये वही भाग्यशाली जीव उस भगवान को जान सकता है। केवल साधन के बल पर हम भगवान को नहीं जान सकते, भगवत्कृपा आवश्यक है लेकिन यह कृपा (भगवत्कृपा) जिसके द्वारा हम भगवान को जान सकते हैं, वह कृपा कैसे प्राप्त होगी? इसका उत्तर चौथे दिवस के प्रवचन में दिया जायेगा।