क्षेत्रीय
07-Jan-2026


आलू-मटर-टमाटर सबसे ज्यादा प्रभावित,छिंदवाड़ा के अलावा, चौरई, मोहखेड़, बिछुआ में ज्यादा असर छिंदवाड़ा (ईएमएस)। शनिवार-रविवार की रात को अचानक जिले में बेहद सर्द मौसम और कंपकंपाने वाली ठंड ने ग्रामीण क्षेत्रों में फिर मुसीबत ला दी है। खेतों और किसानों के बगीचों में लगी सब्जियां पिछले तीन दिन से पाले की चपेट में आ गई है। इससे इस मौसम की प्रमुख फसल मटर, टमाटर और आलू को बुरी तरह प्रभावित किया है। बगीचों में किसानों की ये सब्जियां काली पड़ गई है। पौधों के पत्ते झुलस गए हैं। 2 से 3 डिग्री वाले तापमान में सब्जियों पर मौसम की ये मार चौरई, छिंदवाड़ा, मोहखेड़ के कई गांवों दिखाइ्र दे रही है। सबसे ज्यादा असर मोहखेड़ क्षेत्र में दिख रहा है। यह क्षेत्र सबसे ज्यादा सब्जी उत्पादक क्षेत्र हैं। मदनपुर के संतोष चौरे ने अपने बगीचे में बटाना लगाया है। इस समय इसकी बेहद मांग है लेकिन रविवार की रात में सबसे न्यूनतम पारा 2 डिग्री पर पहुंचा था इसमें उनकी बटाने की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। फल्लियां पाले की मार के कारण सफे द पड गई और उसमें फफूंद लग गई तो पत्तियां भी झुलस गई। जैतपुर कला के संतोष बाडबुदे ने भी अपने बगीचे में आलू और बटाना लगाया है। उनके आलू के पौधे भी मुरझा कर काले पड़ गए है। उभेगांव के भूरा वर्मा और उमरहर के योगेश डेहरिया के ख्ेातों में पाले की मार से पूरी सब्जियों में इसका असर दिख रहा है। छिंदवाड़ा शहर के आसपास रिंग रोड से लगे गुरैया और उसके आसपास के ढानो में भी खेतो में लगी सब्जियां पाले से प्रभावित दिख रही है। मोहखेड़ के ही रामदास डेहरिया, किशनलाल अमरोदे, बैसाखू बरपेटे,राजेश चौरे भी सब्जियेां में लग रहे पाले से चिंतित नजर आ रहे हैं। ध्यान रहे इस समय जिले के ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री पर पहुंच जाने से खेतों में लगी सब्जियों पर पाला पड़ा। इससे टमाटर, आलू और मटर की पत्तियों और फूल सूख गए। किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। इधर चौरई समेत आसपास के गांवों के खेतों में भी पेड़ पौधों की पत्तियों पर बर्फ जमी दिखाई दी। छिंदवाड़ा विकासखण्ड के ग्राम झिरलिंगा के किशन और संतोष के खेत में आलू और टमाटर की फसल लगी थी। पाला पडऩे से पत्तियां और फूल सूख गए। लगभग पांच एकड़ में लगी उनकी सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उनके आसपास के इलाकों की भी यहीं स्थिति सामने आ रही है। पाला लगने के ये लक्षण पाला लगने के लक्षण ये हैं कि सब्जियों की पत्तियां पीली पड़ने लगती है। पत्तियों पर सफेद पाउडर या धब्बे दिखने लगते हैं। ज्यादा ठंड होने के कारण पौधे झुलसकर काले पड़ जाते हैं और फूल और फल पौधों से गिरने लगते हैं। पाले की चपेट में आने के बाद पौधों का वापस हरा भरा होना मुश्किल होता है। मटर की फसल में पाला लगने से पौधे झुलस जाते हैं, फूल-फल गिरते हैं और पैदावार घट जाती है, जिससे पत्तियों पर सफेद धब्बे या पाउडर जैसा दिख सकता है। इससे बचने के लिए पाले की संभावना होने पर सिंचाई करें, धुआं करें, और सल्फर (2.5 ग्राम/लीटर पानी) या बोरॉन (00:52:34) का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिक किसानों को दे रहे सलाह आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र चंदनगांव के मौसम वैज्ञानिक डॉ.संत कुमार शर्मा ने बताया कि किसानों को पहले ही सलाह दी जा रही है कि 5 डिग्री से तापमान कम होने पर सब्जियों में पाले की मार का खतरा रहता है। इस बार मौसम में अचानक उतार चढ़ाव बना हुआ है। इससे मौसम संभलने का मौका नही दे रहा।उन्होंने कहा कि पाला पड़ने पर खेतों की मेढ़ों पर घास, फूस जलाकर धुंआ करने से आसपास का वातावरण गर्म करें। पाले की आशंका होने पर किसानों को चाहिए कि शाम को हल्की सिंचाई करें और खेत के चारों ओर धुआं करें 2.5 ग्राम सल्फर को 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें इससे पौधों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और तापमान नियंत्रित रहता है. ईएमएस/मोहने/ 07 जनवरी 2026