राज्य
08-Jan-2026
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कोरबा (ईएमएस) वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। अनिल अग्रवाल ने खुद इसकी जानकारी देते हुए एक भावुक पोस्ट की हैं। उन्होंने अपने बेटे के निधन को अपनी जिंदगी का सबसे बुरा दिन बताया है। एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा की आज मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन है। मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ 49 साल का था। स्वस्थ था, जिंदगी और सपनों से भरा हुआ था। अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में ठीक हो रहा था। हमें लगा था कि सबसे बुरा समय बीत गया है, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था। अचानक कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया। 3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है। एक मिडिल क्लास परिवार में जन्मा था अग्नि। अपनी माँ का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था। हमेशा हँसता, हमेशा मुस्कुराता, यारों का यार था वो, और अपनी बहन को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी। उसने मेयो कॉलेज अजमेर में पढ़ाई की। बेहद स्ट्रांग पर्सनालिटी थी अग्नि की। बॉक्सिंग चैंपियन, हॉर्स राइडिंग का शौकीन और कमाल का म्यूजिशियन था। उसने फ़ुजैराह गोल्ड जैसी शानदार कंपनी खड़ी की, और हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन भी बना। लेकिन इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद सिंपल था। हमेशा अपने फ्रेंड्स के बीच में ही रहता था। जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था। वो हमेशा ज़मीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा। मैं और किरन टूट से गए हैं। बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया। लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं। वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं। मेरा और अग्नि का सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना। वो हमेशा कहता था कि “पापा, हमारे देश में क्या नहीं है ? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें ?” हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, और सभी युवाओं को रोज़गार मिले। मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगायेंगे। आज फिर वो वादा दोहराता हूँ। अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा। और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा। हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे। अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि। तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी। कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया। समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब ज़िन्दगी कैसे कटेगी बेटा। तुम्हारे बिना ज़िंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा। अग्निवेश अपने पीछे पत्नी, बच्चों और शोक संतप्त माता-पिता को छोड़ गए हैं। इस खबर के बाद औद्योगिक जगत, शुभचिंतकों सहित कोरबा जिले में भी शोक की लहर है। 08 जनवरी / मित्तल