- प्रदेश की 52% आबादी योग्यता के बाद भी मोहताज नैनपुर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी लगभग 52% है उसके बावजूद ओबीसी के हित में प्रदेश की भाजपा सरकार आरक्षण की व्यवस्था तय कर पाने में आज तक असफल रही है लगातार 22 वर्षों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है परंतु विगत 18 माह के लिए आई कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण दिया था परंतु शिवराज सिंह चौहान ने इस व्यवस्था को महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अभिमत के आधार पर 13% होल्ड एवं 14% को आरक्षण का लाभ दिया गया इसके कारण प्रदेश भर में लगभग 9 हजार ऐसे ओबीसी अभ्यर्थी है जो इस आरक्षण के कारण सरकारी नौकरी पाने से वंचित रह गए हैं जबकि इनमें से कुछ अभ्यर्थियों ने तो सामान्य वर्ग के कट ऑफ से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं परंतु वे सरकारी नौकरी की दौड़ से बाहर हो गए हैं इससे ओबीसी वर्ग का प्रदेश सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है और ओबीसी वर्ग की आबादी लगभग भाजपा की सरकार से चिढ़ गई है युवाओं ने विभिन्न प्रकार की आंदोलन करने की रूपरेखा तय कर ली है जिसके चलते जनवरी माह की 30 तारीख को मध्य प्रदेश की वर्तमान मोहन सरकार के विरुद्ध ओबीसी वर्ग का शंखनाथ आंदोलन प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने जा रहा है प्रश्न यह उठता है कि जब हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने यह कह दिया है कि ओबीसी आरक्षण पर किसी प्रकार की रोक न्यायालय द्वारा नहीं लगाई गई है तब भाजपा की मोहन सरकार ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ देने में इतना विलंब क्यों कर रही है! जबकि ओबीसी आरक्षण को लेकर मोहन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हर दिन सनी की घोषणा की थी जबकि हालत यह है की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल तुषार मेहता उपस्थित तो होते हैं पर वह केवल समय मांग कर सुनवाई की तारीख आगे बढ़वा लेते हैं और मोहन सरकार इस पर कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं आ रही है इससे लगता है कि सरकार भी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को टालना चाहती है, इससे ओबीसी युवक वर्ग की एक आबादी बेरोजगारी का डांस झेल रही है और सामान्य से ज्यादा अंक आने के बाद भी होल्ड में लटक कर रह गई है। ईएमएस/09/01/26