सैन फ्रांसिस्को (ईएमएस)। वर्तमान समय में ऑफिस के काम से लेकर डेली रूटीन तक, लोग चैटजीपीटी, ग्रोक, जेमिनी जैसे एआई टूल्स की मदद से अपने कई काम आसान बना रहे हैं। हालांकि, जितने ज्यादा इनके फायदे हैं, उतनी ही सावधानी बरतना भी जरूरी हो जाता है। एआई चैटबॉट्स का गलत इस्तेमाल न सिर्फ आपको गलत जानकारी दे सकता है, बल्कि आपकी प्राइवेसी के लिए भी खतरा बन सकता है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एआई सिस्टम टेक्स्ट प्रोसेस करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, न कि आपकी पर्सनल या गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए। ऐसे में कभी भी चैटबॉट्स के साथ बैंक डिटेल्स, आधार नंबर, पासवर्ड, पर्सनल डॉक्यूमेंट्स या ऑफिस से जुड़ी कॉन्फिडेंशियल जानकारी शेयर नहीं करनी चाहिए। भले ही कई प्लेटफॉर्म यह दावा करते हों कि वे बातचीत को याद नहीं रखते, फिर भी इनपुट डेटा को क्वालिटी और सिक्योरिटी के उद्देश्य से स्टोर या रिव्यू किया जा सकता है। संवेदनशील फाइलों या निजी डेटा का एआई से विश्लेषण करवाना प्राइवेसी रिस्क को बढ़ाता है और जानकारी के दुरुपयोग या लीक होने की आशंका पैदा करता है। इसके साथ ही, एआई चैटबॉट्स को डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। चैटजीपीटी या जेमीनी जैसे प्लेटफॉर्म मेडिकल टर्म्स समझा सकते हैं या लक्षणों की सामान्य जानकारी दे सकते हैं, लेकिन वे बीमारी का सही डायग्नोसिस या ट्रीटमेंट प्लान तय नहीं कर सकते। हेल्थ से जुड़े फैसलों के लिए फिजिकल जांच, मेडिकल हिस्ट्री और अनुभवी डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी होती है। दवाओं की डोज, इलाज या डायग्नोसिस के लिए एआई पर भरोसा करने से सही इलाज में देरी हो सकती है और गंभीर नुकसान भी हो सकता है। एआई चैटबॉट्स से अवैध या अनैतिक कामों से जुड़े निर्देश मांगना भी खतरनाक साबित हो सकता है। हैकिंग, धोखाधड़ी, पायरेसी, टैक्स चोरी या किसी सिस्टम में गैरकानूनी हेरफेर से जुड़े सवाल पूछना न सिर्फ गलत है, बल्कि इसके कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की रिक्वेस्ट्स को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय मौजूद होते हैं, लेकिन फिर भी जिम्मेदारी पूरी तरह यूजर की ही होती है। सबसे अहम बात यह है कि एआई द्वारा दिए गए हर जवाब को अंतिम सच न मानें। चैटबॉट्स डेटा पैटर्न के आधार पर जवाब तैयार करते हैं, न कि रियल-टाइम वेरिफिकेशन के जरिए। ऐसे में गलतियां, अधूरी या पुरानी जानकारी मिलना संभव है। कानूनी फैसलों, फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट या ब्रेकिंग न्यूज जैसे मामलों में बिना क्रॉसचेक किए एआई के जवाबों पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। सुदामा/ईएमएस 10 जनवरी 2026