मनोरंजन
11-Jan-2026
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मुंबई (ईएमएस)। 1970 और 1980 के दशक में बॉलीवुड अभिनेत्री रीना रॉय ने जिस तरह अभिनय की दुनिया में खुद को साबित किया, वह आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। उनकी खूबसूरती और अभिनय क्षमता ने उन्हें सिर्फ हिट फिल्मों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। रीना ने हाल ही में 7 जनवरी को अपना जन्मदिन मनाया। उनका असली नाम सायरा अली था और उनका परिवार फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ था। उनके पिता सादिक अली अभिनेता थे और उनकी मां शारदा रॉय भी फिल्मों में काम करती थीं। माता-पिता के तलाक के बाद उनका नाम बदलकर पहले रूपा रॉय और फिर फिल्म निर्माता की सलाह पर रीना रॉय रखा गया। रीना ने 1972 में फिल्म जरूरत से अपने करियर की शुरुआत की। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं हुई, लेकिन रीना की अदाकारी ने दर्शकों और फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने 1973 में जैसे को तैसा और 1975 में जख्मी जैसी फिल्मों में काम किया। नेगेटिव किरदारों के जरिए उन्होंने अपने अभिनय की ताकत दिखाना शुरू किया। 1976 में उनका करियर नया मुकाम हासिल करता है। कालीचरण और नागिन जैसी फिल्मों में रीना ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। कालीचरण में शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को बहुत पसंद आई, जबकि नागिन में उन्होंने इंसान और नागिन के रूप में जटिल किरदार निभाया। इस फिल्म ने उन्हें बॉक्स ऑफिस स्टार बना दिया। इस दौरान उनकी खूबसूरती और अभिनय की मजबूती ने दर्शकों को प्रभावित किया। 1977 में रीना ने अपनापन में काम किया और फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामांकित हुईं। इसके बाद 1980 में आशा, 1981 में नसीब, और 1982 में सनम तेरी कसम जैसी हिट फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग किरदार निभाए। कभी वह प्यार में हारी प्रेमिका थीं, कभी संस्कारी बहू और कभी साहसी महिला। उनके किरदारों में हमेशा गहराई और मजबूती दिखती थी। रीना ने अपने करियर में जितेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा और कई बड़े सितारों के साथ काम किया। उनके किरदार चाहे नेगेटिव हों या पॉजिटिव, हमेशा दर्शकों के दिलों पर असर छोड़ते थे। 1983 में उन्होंने अपने करियर में ब्रेक लिया और पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी की। तलाक के बाद वे भारत लौट आईं और 1993 में आदमी खिलौना है से वापसी की। इसके बाद उन्होंने अजय, गैर और रिफ्यूजी जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं। रीना ने टीवी में भी काम किया और ईना मीना डीका, दाल में काला है, सहारा और गैर जैसे शो में अपने अभिनय का जादू दिखाया। रीना रॉय की ये यात्रा यह दर्शाती है कि सच्चा अभिनय सिर्फ भूमिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कलाकार की मेहनत, आत्मविश्वास और किरदारों में दिल लगाने की क्षमता उसे हमेशा यादगार बना देती है। बता दें कि बॉलीवुड की दुनिया में कई कलाकार हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जिनकी अदाकारी हर किरदार में इतनी मजबूती से झलकती है कि दर्शक उन्हें हमेशा याद रखते हैं। रीना रॉय उन्हीं में से एक हैं। चाहे कोई रोल नेगेटिव हो या पॉजिटिव, उनकी परफॉर्मेंस में आत्मविश्वास और प्रामाणिकता देखने को मिलती है। सुदामा/ईएमएस 11 जनवरी 2026