कोरबा (ईएमएस) 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। बिहार और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, गुजरात-राजस्थान में उत्तरायण, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में पोंगल, महाराष्ट्र-तेलंगाना में मकर संक्रांति, असम में भोगली बिहू और पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। जिले में भी इस पर्व को लेकर सभी समाजों में खासा उत्साह है। विशेष रूप से मलयाली समाज द्वारा मनाई जाने वाली मकर विलक्कु पूजा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस अवसर पर श्री अय्यप्पा स्वामी की मंगल थाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। उक्त शोभायात्रा सीतामढ़ी से टी.पी. नगर होते हुए सुभाष ब्लॉक स्थित अय्यप्पा मंदिर तक पहुंचेगी। पूरी यात्रा केरल की पारंपरिक संस्कृति, वेशभूषा और आस्था की झलक पेश करेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह मकर संक्रांति विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन षट्तिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो वर्षों बाद पड़ रहा है। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और अनुराधा नक्षत्र का संयोग पर्व की शुभता को और बढ़ाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3:13 बजे होगा, जबकि पुण्यकाल शाम 5:46 बजे तक रहेगा। हालांकि मकर संक्रांति का पर्व सूर्योदय से ही मान्य रहेगा। इस दौरान स्नान, सूर्योपासना, व्रत, भगवान विष्णु की पूजा तथा तिल, गुड़, खिचड़ी और कंबल दान की परंपरा है। मान्यता है कि इन वस्तुओं के दान से दोगुना पुण्य प्राप्त होता है। ज्योतिषी पं. विवेकशील पाण्डेय के अनुसार मकर संक्रांति प्रमुख सौर पर्व है, जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। सूर्य का अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करना कई राशियों के लिए शुभफल देने वाला माना गया है। 11 जनवरी / मित्तल