जगन्नाथ मंदिर के सेवायत, संत और बुद्धिजीवी राज्य सरकार से आग्रह पुरी,(ईएमएस)। अयोध्या में राम मंदिर के करीब 15 किलोमीटर के दायरे में गैर-शाकाहारी भोजन और शराब पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब ओडिशा के पुरी में भी मांस और शराब-मुक्त नगरी घोषित करने की मांग तेज हुई है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सेवायत, संत और बुद्धिजीवी राज्य सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि मंदिर की पवित्रता और गरिमा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि अयोध्या में इस तरह का प्रतिबंध संभव है, तब पुरी में गैर-शाकाहारी भोजन की खुलेआम बिक्री को अनुमति देना अनुचित है। यह बहस कानून मंत्री की पिछले वर्ष 8 जून की घोषणा की याद दिलाती है। कानून मंत्री ने वादा किया था कि बड़दंडा मार्ग और मंदिर के चारों ओर दो किलोमीटर के दायरे में गैर-शाकाहारी भोजन और शराब पर प्रतिबंध लगेगा। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ गया है। वर्तमान में ग्रैंड रोड और गुंडिचा मंदिर के आसपास मांस और मटन बेचने वाले फास्ट-फूड स्टॉलों की कतारें लगी हैं। मोची साही, कॉलेज रोड, रेड क्रॉस रोड और मसानी चंडी छक जैसे इलाके भी इन व्यापारों से प्रभावित हैं। लोगों और मठों के वरिष्ठ सेवायतों का कहना है कि पवित्र नगरी का आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और श्रद्धालु इससे आहत हो रहे हैं। वरिष्ठ सेवायत गणेश महासुआरा ने कहा कि मंदिर, समुद्र तट और पवित्र तालाबों के पास तुरंत गैर-शाकाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। नेबला दास मठ के महंत रामचरण दास महाराज ने कहा कि पुरी सभी आध्यात्मिक स्थलों का केंद्र है और बड़दांड की सड़कों पर मांस और मछली की बिक्री रोकना आवश्यक है। ‘गैर-शाकाहारी-मुक्त पुरी’ की मांग 1999 से उठ रही है और ओडिशा युवा चेतना परिषद के 32 संगठन इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पुरी नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी अभिमन्यु बेहरा ने कहा कि यदि ओडिशा सरकार से स्पष्ट और सख्त निर्देश मिलते हैं, तब प्रशासन बड़दंडा में गैर-शाकाहारी भोजन की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई करेगा। अयोध्या की तुलना से जनभावना और तेज हुई है, जिससे राज्य सरकार पर निर्णायक कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। आशीष दुबे / 12 जनवरी 2026